आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में औषधीय पौधों से लेकर क्षारसूत्र तक विशेष आयोजन
जोधपुर। धन्वंतरि त्रयोदशी के पावन अवसर पर शनिवार को यूथ हॉस्टल, जोधपुर में भगवान धन्वंतरि का पूजन-अर्चन कर आयुर्वेद के शाश्वत ज्ञान और सेवा भाव का उत्सव मनाया जाएगा। राज्यस्तरीय आयुर्वेद नर्सेज आमुखीकरण प्रशिक्षण के तीसरे बैच में जोधपुर, जालोर, नागौर और पाली जिलों से आए 108 नवनियुक्त नर्सिंग कर्मी भाग ले रहे हैं। पूर्णतः आवासीय इस प्रशिक्षण में पंचकर्म, क्षारसूत्र चिकित्सा, मातृ-शिशु देखभाल, रिकॉर्ड कीपिंग और डिजिटल रिपोर्टिंग जैसे विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान हो रहे हैं।
सेवा, संवेदना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सशक्त हो रही नर्सिंग प्रणाली
नोडल प्रभारी डॉ. अशोक मित्तल ने कहा कि “धनतेरस का वास्तविक अर्थ सोना-चाँदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जैसी अमूल्य संपत्ति का संरक्षण है।” उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल उपचार नहीं, बल्कि करुणा और कर्तव्य का संगम है।
प्रथम सत्र में डॉ. निकिता पंवार ने औषधीय पौधों के सर्वेक्षण और रिपोर्टिंग प्रणाली पर व्याख्यान दिया, वहीं डॉ. गायत्री ने मातृ-शिशु देखभाल और डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली की नवीन तकनीकों पर प्रकाश डाला। डॉ. देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नर्सिंग कर्मियों की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों पर चर्चा की।
क्षारसूत्र चिकित्सा — परंपरा और आधुनिकता का संतुलित उपचार
तीसरे सत्र में डॉ. प्रेमसुख ने क्षारसूत्र चिकित्सा की विशिष्टता बताते हुए कहा कि यह पद्धति भगंदर, अर्श और नाड़ीव्रण जैसे जटिल रोगों में बिना चीरे या टांके के रोगमुक्ति प्रदान करती है। वहीं डॉ. राजेन्द्र तातेड़ ने आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार और टीमवर्क की महत्ता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में डॉ. रामलाल जाट, डॉ. गायत्री, डॉ. देवेन्द्र सिंह राठौड़, वरिष्ठ सहायक मदन सिंह राजपुरोहित, कम्पाउंडर सलीम सुल्तान, श्यामसुंदर शर्मा, दिनेश चौधरी, ईश्वर वैष्णव, अनोपाराम गर्ग और भोमाराम लखावत सहित अन्य अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।


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