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पाठशाला बनेगी अब खुशिशाला:मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलबीइंग की दिशा में राजस्थान की अनूठी पहल

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जोधपुर। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर द्वारा प्राथमिक शिक्षा में वेलबीइंग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई ऐतिहासिक पहल की गई है। इस दिशा में “खुशिशाला – खुद की खोज” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है, जो बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और नैतिक विकास पर केंद्रित है।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जोधपुर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन डाइट प्रधानाचार्य मंजू शर्मा, डी.आर.यू. प्रभागाध्यक्ष शकुन्तला श्रीमाली तथा डी.आर.यू. प्रभागाधिकारी हरचंद सिंह सोलंकी द्वारा किया गया।

प्रधानाचार्य मंजू शर्मा ने प्रशिक्षण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य बच्चों की सफलता और संपूर्ण विकास का आधार है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को एक ऐसा वातावरण दें, जहाँ वे खुलकर सोच सकें, सीख सकें और खुश रह सकें।

डी.आर.यू. प्रभागाध्यक्ष शकुन्तला श्रीमाली ने शिक्षक संदर्शिका का परिचय देते हुए इसके उपयोग और विद्यालयों में “खुशिशाला” के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है — परिवार, समाज और शिक्षा व्यवस्था सभी स्तरों पर बच्चों पर करियर और सफलता का अत्यधिक दबाव है, जिसके चलते किशोरों में अवसाद और आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ रही हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि वे बच्चों के मानसिक संतुलन और खुशी को प्राथमिकता दें।

उल्लेखनीय है कि तीन वर्षों की गहन अकादमिक शोध प्रक्रिया के बाद तैयार यह शिक्षक संदर्शिका अमेरिकी संस्था ब्रियो और राजस्थान की सक्रिय एनजीओ क्षमतालय फाउंडेशन के सहयोग से बनी है। यह कार्यक्रम राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर के दीर्घकालीन “खुशिशाला – खुद की खोज” पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम का उद्देश्य कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक और नैतिक मूल्यों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। इस पहल के माध्यम से बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें एक सुरक्षित, शांत और आनंदपूर्ण वातावरण प्रदान करना लक्ष्य है।

राजस्थान ने इस अभिनव पहल के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई है।प्रशिक्षण में मुख्य प्रशिक्षक तुलसीराम सोनी, सूर्यप्रताप सिंह जोधा तथा क्षमतालय फाउंडेशन से इशू उपस्थित रहे। कार्यक्रम में खुशीशाला के मुख्य सलाहकार एवं सहयोगी के रूप में राजेश मेनारिया ने भी मार्गदर्शन प्रदान किया।

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