भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश का रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserve) वर्तमान में लगभग 64% भरा हुआ है, जो आपात स्थिति में करीब 9.5 दिनों की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है,भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

कितना भरा है रणनीतिक तेल भंडार?
सरकार के अनुसार, Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) के पास इस समय लगभग 3.372 मिलियन टन कच्चा तेल उपलब्ध है।
- कुल क्षमता का लगभग 64% भंडारण भरा हुआ
- आपात स्थिति में करीब 9.5 दिनों की सप्लाई
- वास्तविक भंडार लगातार बदलता रहता है (स्टोरेज और खपत के आधार पर)
कहां स्थित हैं भारत के तेल भंडार?

भारत ने रणनीतिक तेल भंडारण के लिए भूमिगत सुविधाएं बनाई हैं:
- Visakhapatnam
- Mangaluru
- Padur
इन तीनों स्थानों पर कुल 5.33 मिलियन टन की भंडारण क्षमता मौजूद है, जिसका उपयोग पेट्रोल और डीजल उत्पादन के लिए कच्चा तेल सुरक्षित रखने में किया जाता है।
क्यों बढ़ी चिंता?
रणनीतिक तेल भंडार हाल ही में इसलिए चर्चा में है क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
भारत अपनी लगभग 88% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जो इसे वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है।
तेल आयात पर भारी खर्च
चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में भारत ने करीब 226 मिलियन टन तेल आयात किया
- इस पर लगभग 110 अरब डॉलर खर्च हुए
- आयात का बड़ा हिस्सा Saudi Arabia, Iraq और United Arab Emirates से आता है
- इसके अलावा, प्राकृतिक गैस और एलपीजी के आयात पर भी भारी खर्च किया जा रहा है।

नए भंडारण प्रोजेक्ट पर काम जारी
सरकार ने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है:
- ओडिशा के Chandikhol में 4 मिलियन टन क्षमता
- कर्नाटक के Padur में 2.5 मिलियन टन अतिरिक्त क्षमता
इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।
41 देशों से तेल आयात करता है भारत
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए भारत अब विविध स्रोतों से तेल आयात कर रहा है।
पारंपरिक आपूर्तिकर्ता: Iraq, Saudi Arabia, United Arab Emirates
नए स्रोत: United States, Nigeria, Brazil, Mexico आदि।

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