नईदिल्ली। भारतीयलोकतंत्रकीसबसेबड़ीखूबसूरतीइसकीविविधताहै।संसदऔरविधानसभाओंमेंसमाजसेवी,किसान,शिक्षकऔरकलाकारोंकेसाथ-साथअबकॉरपोरेटजगतकेदिग्गजभीतेजीसेअपनीमौजूदगीदर्जकरारहेहैं।पिछलेकुछदशकोंमेंयहट्रेंडस्पष्टहुआहैकिकईसफलउद्यमीकेवलव्यापारतकसीमितनहींरहनाचाहते,बल्किनीति-निर्धारणकीप्रक्रियाकाहिस्साबनकरदेशकीदिशातयकरनेमेंभूमिकानिभानाचाहतेहैं।
दरअसल,बिजनेसजगतसेराजनीतिमेंआनेवालेयेचेहरेअपनेसाथसिर्फआर्थिकताकतहीनहीं,बल्किप्रबंधनकौशल,रणनीतिकसोचऔरपरिणाम-केंद्रितकार्यशैली भीलेकरआतेहैं।जटिलआर्थिकचुनौतियोंकोसमझनेऔरसमयसीमामेंलक्ष्यहासिलकरनेकीउनकीक्षमताअक्सरशासन-प्रशासनकेलिएउपयोगीसाबितहोतीहै।

उद्योगसेसियासततककेप्रमुखचेहरे
उत्तरप्रदेशकीराजनीतिमेंकंवरदीपसिंह (के.डी.सिंह) एकबड़ाउदाहरणरहेहैं।लखनऊकेप्रतिष्ठितकेडीसिंहबाबूस्टेडियमसेलेकरबड़ेव्यावसायिकघरानोंतकअपनीपहचानबनानेवालेसिंहनेसमाजवादीपार्टीकेजरिएसत्ताकेगलियारोंमेंअपनीमजबूतउपस्थितिदर्जकराई।विधानपरिषदसदस्यकेतौरपरउन्होंनेऔद्योगिकनीतियोंमेंव्यापारिकदृष्टिकोणकोशामिलकरनेकीवकालतकी।
देशकेबड़ेउद्योगपतियोंमेंनवीनजिंदल कानामभीप्रमुखतासेलियाजाताहै।जिंदलस्टीलएंडपावरकेशीर्षसेराजनीतिकेमैदानतककाउनकासफरकईमायनोंमेंप्रेरणादायकमानाजाताहै।ऊर्जाऔरइंफ्रास्ट्रक्चरजैसेमुद्दोंपरसंसदमेंउनकीस्पष्टसमझदेखनेकोमिली।
तकनीकऔरडिजिटलक्षेत्रसेराजनीतिमेंआनेवालोंमेंराजीवचंद्रशेखर सबसेचर्चितनामोंमेंशामिलहैं।एकसफलटेकउद्यमीसेकेंद्रीयमंत्रीबननेतककाउनकासफरयहबताताहैकिडिजिटलइंडिया,साइबरसिक्योरिटीऔरडेटासंप्रभुताजैसेविषयोंपरविशेषज्ञतानीतिनिर्माणमेंकितनीअहमहोसकतीहै।
क्षेत्रीयराजनीतिमेंभीबढ़तीभागीदारी
सिर्फराष्ट्रीयस्तरपरहीनहीं,बल्किराज्योंमेंभीउद्योगजगतकेकईचेहरेराजनीतिमेंसक्रियहुएहैं।
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अरविंदखन्ना नेखन्नाग्रुपऑफइंडस्ट्रीजकेअनुभवकोउत्तरप्रदेशकेविकाससेजोड़नेकाप्रयासकिया।
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असममेंबदरुद्दीनअजमल नेअजमलग्रुपकेसाथ-साथअपनीराजनीतिकपार्टीएआईयूडीएफखड़ीकरराज्यकीराजनीतिमेंप्रभावशालीभूमिकाबनाई।
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दक्षिणभारतमेंके.पंडियाराजन जैसेनेताओंनेकॉरपोरेटअनुभवकोशिक्षाऔरकौशलविकासकेक्षेत्रमेंलागूकरनेकीकोशिशकी।
राजनीतिमें ‘रणनीतिकार’भी
राजनीतिमेंसभीलोगचुनावीमैदानमेंनहींउतरते,कुछलोगरणनीतिकारकीभूमिकानिभातेहैं।इसीकड़ीमेंपीआर24×7केफाउंडर,लेखकऔरसमाजसेवीडॉ.अतुलमिलकराम कानामभीसामनेआताहै।उन्होंनेबुंदेलखंड24×7जैसेडिजिटलप्लेटफॉर्मकेजरिएक्षेत्रीयमुद्दोंकोराष्ट्रीयविमर्शमेंलानेकीकोशिशकी।
इसीतरहप्रवीणखंडेलवाल जैसेव्यापारिकसंगठनोंसेजुड़ेनेताओंनेदेशकेकरोड़ोंछोटेव्यापारियोंऔरदुकानदारोंकीआवाजकोसरकारतकपहुंचानेकाकामकियाहै।
फायदेऔरचुनौतियां
हालांकि,इसट्रेंडकेसाथएकअहमसवालभीजुड़ारहताहै—क्याव्यापारिकहितऔरराष्ट्रहितसाथ-साथचलसकतेहैं? आलोचकअक्सरहितोंकेटकरावकीआशंकाजतातेहैंऔरकहतेहैंकिकहींनीतियांकिसीखासउद्योगसमूहकोलाभपहुंचानेकेलिएनबनजाएं।
इसीलिएविशेषज्ञमानतेहैंकिइसनएदौरमेंपारदर्शिता,जवाबदेहीऔरनैतिकआचरण सबसेजरूरीतत्वहैं।

लोकतंत्रकेलिएनईदिशा
इसकेबावजूदकईविश्लेषकोंकामाननाहैकिकारोबारऔरराजनीतिकीयहसाझेदारीभारतीयलोकतंत्रकेलिएनईसंभावनाएंलेकरआईहै।यदिकोईसफलउद्यमीअपनीकार्यकुशलता,ईमानदारीऔरदूरदर्शिताकोजनसेवामेंलगाताहै,तोइससेनिवेश,रोजगारऔरआर्थिकविकास केनएरास्तेखुलसकतेहैं।

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