जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में दीक्षांत शिक्षा का महत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
जोधपुर । जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह का आयोजन पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर स्थित मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए चरण की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को कर्म में बदलते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान करें।
राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदियों से समग्र विकास, नैतिक मूल्यों और आत्मबोध पर आधारित रही है। वेद, उपनिषद और गुरुकुल प्रणाली ने न केवल विद्या दी, बल्कि चरित्र निर्माण की शिक्षा भी दी। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय करें, ताकि विद्यार्थी केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनें।
इस मौके पर राज्यपाल ने यह भी कहा कि आज का युग सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि एआई मानव मस्तिष्क का स्थान नहीं ले सकता और इसे संदर्भ के रूप में उपयोग करना चाहिए, लेकिन बौद्धिक क्षमता का विकास स्वयं करना जरूरी है।
52,682 विद्यार्थियों को उपाधियां, 59 स्वर्ण पदक वितरित
समारोह में कुल 52,682 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध उपाधियां प्रदान की गईं, और 59 स्वर्ण पदक वितरित किए गए। इनमें से 40 स्वर्ण पदक छात्राओं को प्रदान किए गए, जो विश्वविद्यालय में छात्राओं की शैक्षणिक उपलब्धियों को दर्शाते हैं। स्वर्ण पदकों का वितरण विभिन्न संकायों में किया गया, जिसमें विज्ञान, कला, वाणिज्य, विधि और अभियांत्रिकी संकाय शामिल हैं।
प्रो. अविनाश अग्रवाल का दीक्षांत उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और दीक्षांत वक्ता आईआईटी के निदेशक प्रो. अविनाश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और विद्यार्थियों को समाज के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया।
समारोह का समापन
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कुलगुरु ने स्मृति चिह्न भेंट किए। इसके बाद पीएचडी डिग्री धारकों एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ समूह फोटोग्राफ लिया गया, और शैक्षणिक शोभायात्रा की वापसी के साथ समारोह संपन्न हुआ।


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