जयपुर/रानू बैरागी । मुंबई का प्रतिष्ठित वेजिटेरियन डाइनिंग डेस्टिनेशन, क्रीम सेंटर, इस साल अपने शानदार 65 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मना रहा है। 1958 में रमेश चोना द्वारा स्थापित, क्रीम सेंटर ने भारतीय खानपान के क्षितिज पर अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। मुंबई में जन्मे इस ब्रांड ने नाचोस और सिज़लिंग ब्राउनी जैसे व्यंजनों से भारतीय खाद्य संस्कृति में क्रांतिकारी बदलाव लाया है, और आज यह ब्रांड पूरे देश में अपनी प्रतिष्ठा का विस्तार कर रहा है, खासकर जयपुर में जहां इसका प्रमुख आउटलेट लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया है।
क्रीम सेंटर का जयपुर में स्वागत इस बात का प्रतीक है कि कैसे पुराने समय के क्लासिक व्यंजन नए दौर के साथ मिलकर एक अलग पहचान बना रहे हैं। यहाँ के शाकाहारी व्यंजन, जो कभी मुंबई की पहचान बन चुके थे, अब जयपुरवासियों के दिलों में भी बस चुके हैं। क्रीम सेंटर का माहौल पुराने समय की यादों और आधुनिकता का बेहतरीन मिश्रण प्रस्तुत करता है, जो इसे एक अनोखा अनुभव बनाता है।
ब्रांड की सफलता के पीछे, संजीव चोना के दूरदर्शी नेतृत्व और उनके पुत्र ऋषि चोना के इनोवेटिव दृष्टिकोण की अहम भूमिका रही है। ऋषि चोना ने क्रीम सेंटर को न केवल अपनी पुरानी विरासत से जोड़े रखा, बल्कि नए आइडिया और डिज़ाइन के जरिए इसे और भी आकर्षक बना दिया।
इस नए अध्याय पर बात करते हुए, ऋषि चोना ने कहा, “हमारे लिए क्रीम सेंटर का उद्देश्य हमेशा से एक ही रहा है – भोजन के माध्यम से खुशियाँ बाँटना और परिवारों को एकजुट करना। यह देखकर खुशी होती है कि जो डिशेज़ एक समय मुंबई की खाद्य संस्कृति का हिस्सा थीं, वे अब पूरे भारत में प्रसिद्ध हो रही हैं। जयपुर में, जहाँ हमें अपनी एक मजबूत गेस्ट कम्युनिटी मिल चुकी है, हमारी पुरानी रेसिपीज़ को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है।”
फ्रैंचाइज़ी पार्टनर आदित्य बाफना ने भी इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “जयपुर में शुद्ध और स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन की हमेशा से अहमियत रही है, और क्रीम सेंटर इस आदत में पूरी तरह फिट बैठता है। यहाँ के गेस्ट्स ने हमारे क्लासिक व्यंजनों को बेहद पसंद किया है, जो एक तरह से मुंबई की यादों को जीवित रखते हैं।”
क्रीम सेंटर का जयपुर में नया आउटलेट न केवल पुराने स्वादों का आनंद देने का एक अवसर है, बल्कि यह ब्रांड की परंपरा, इनोवेशन और कम्युनिटी की ताकत का भी प्रतीक है। जयपुर में क्रीम सेंटर का उदय दर्शाता है कि शाकाहारी भोजन की विरासत अब सिर्फ मुंबई में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में अपना जादू बिखेर रही है।


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