6G तकनीक के विकास और वैश्विक मानकों को आकार देने के लिए भारत ने बढ़ाया बड़ा कदम, AI, रोबोटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी को मिलेगा नया विस्तार
नई दिल्ली। 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार के बीच भारत ने अब अगली पीढ़ी की संचार तकनीक 6G की तैयारियों को भी गति दे दी है। भारत 6G तकनीक के विकास और सहयोग को बढ़ावा देने वाले अमेरिका के नेतृत्व वाले एक वैश्विक समूह में शामिल हो गया है। इस समूह में अमेरिका समेत कुल 25 देश शामिल हैं।
यह अहम पहल अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित चैपल हिल में आयोजित G20 इनोवेशन मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान सामने आई। बैठक में भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने हिस्सा लिया। इस दौरान अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक के साथ भारत की 6G साझेदारी समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी और निवेश संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई।
6G को लेकर भारत ने बढ़ाया बड़ा कदम
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, भारत अब उन देशों के समूह का हिस्सा है जो भविष्य की 6G संचार तकनीक के विकास, नवाचार और सुरक्षित डिजिटल ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
इस वैश्विक सहयोग का उद्देश्य 6G तकनीक को विकसित करने के साथ-साथ इसके लिए आवश्यक तकनीकी मानकों, सुरक्षा व्यवस्था और नवाचार को बढ़ावा देना है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में 6G केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में व्यापक बदलाव ला सकता है।
AI और रोबोटिक्स में आएगा बड़ा बदलाव
6G तकनीक को भविष्य की डिजिटल क्रांति का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। इसके जरिए बेहद तेज और कम विलंबता वाले नेटवर्क विकसित किए जाने की उम्मीद है।
इसका प्रभाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

तेज संचार नेटवर्क के कारण बड़ी मात्रा में डेटा का रियल टाइम में आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे नई डिजिटल सेवाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों को बढ़ावा मिल सकता है।
G20 बैठक में भारत की मजबूत मौजूदगी
G20 इनोवेशन बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जितिन प्रसाद ने किया। उनके साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान उभरती हुई तकनीकों, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक तकनीकी सहयोग को लेकर चर्चा हुई। बैठक के अंत में सदस्य देशों की ओर से साझा बयान भी जारी किया गया, जिसमें नई तकनीकों को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
सेमीकंडक्टर और AI पर भी अमेरिका से चर्चा
जितिन प्रसाद और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक के बीच हुई बातचीत में 6G के अलावा सेमीकंडक्टर, AI और डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल रहे।
भारत ने अमेरिका से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 2.0) में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच AI तकनीक में सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत लगातार सेमीकंडक्टर निर्माण और AI इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ तकनीकी और निवेश सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक टेक्नोलॉजी एजेंडा में भारत की बढ़ती भूमिका
6G गठबंधन में भारत की भागीदारी को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में देश की बढ़ती भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। भारत पहले ही AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और 5G जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
6G के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारत को नई तकनीकों के विकास, अनुसंधान, मानकीकरण और साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा।
6G सिर्फ तेज इंटरनेट नहीं, डिजिटल बदलाव की नई नींव
आने वाले वर्षों में 6G तकनीक मोबाइल इंटरनेट की मौजूदा क्षमताओं से कहीं आगे जाने की उम्मीद है। इसके जरिए हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के साथ AI आधारित सेवाओं, रोबोटिक्स, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन को नई गति मिल सकती है।
भारत का यह कदम संकेत देता है कि देश 5G के विस्तार के साथ-साथ 6G की वैश्विक तकनीकी दौड़ में भी शुरुआती दौर से अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है।

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