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20 साल बाद डॉक्टरी छोड़ महिला बनीं बेकर, बोलीं— ‘पाव रोटी बेचकर मिला असली सुकून’

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स्टेथोस्कोप छोड़ ओवन थामा: 20 साल डॉक्टरी करने वाली महिला अब बेच रहीं स्टीम्ड बन्स, बोलीं— ‘थकान में भी सुकून है’
सफेद एप्रन, गले में स्टेथोस्कोप और हाथ में गंभीर मरीजों की मेडिकल फाइलें—अमूमन किसी डॉक्टर की पहचान इन्हीं चीजों से होती है। समाज में डॉक्टरी को सबसे प्रतिष्ठित, सुरक्षित और सम्मानित पेशों में गिना जाता है। ऐसे में यदि कोई डॉक्टर अपने 20 साल पुराने मेडिकल करियर को हमेशा के लिए अलविदा कहकर सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान पर पाव या स्टीम्ड बन्स बनाने लगे, तो किसी का भी हैरान होना लाजिमी है। चीन की एक महिला डॉक्टर डोंग मिन ने बिल्कुल ऐसा ही साहसिक फैसला लेकर दुनिया को चौंका दिया है। लगभग 50 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी और अब वह बन्स बेचकर न केवल सफल उद्यमी बन चुकी हैं, बल्कि अपनी खोई हुई मानसिक शांति भी हासिल कर चुकी हैं।

डॉक्टरी का चमकता करियर और बढ़ता मानसिक दबाव

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, डोंग मिन ने 1999 में चीन की प्रतिष्ठित वुहान यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने शेन्जेन शहर के व्यस्त अस्पतालों में एक काबिल स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) के तौर पर काम शुरू किया। लंबे समय तक वहां सेवाएं देने के बाद वह वुहान लौट आईं और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी।
बाहर से देखने पर उनका जीवन बेहद सफल और व्यवस्थित नजर आता था, लेकिन सफेद कोट के भीतर गहरा मानसिक तनाव पल रहा था। डोंग मिन के मुताबिक, एक डॉक्टर की जिंदगी सिर्फ मरीजों की नब्ज टटोलने और दवा लिखने तक सीमित नहीं होती। उनके ऊपर प्रशासनिक कागजी कार्रवाई, अंतहीन ऑडिट, बार-बार होने वाली जांच और अस्पताल की कानूनी जवाबदेहियों का भारी बोझ रहता था। हर दिन एक नई उलझन, हर घंटे एक नया तनाव और काम के दौरान होने वाली हर छोटी बात पर कानूनी जोखिम की तलवार लटकी रहती थी। दो दशकों तक इस भारी तनाव को ढोते-ढोते वह अंदर से टूट चुकी थीं। आखिरकार, 50 की उम्र के मुहाने पर उन्होंने तय किया कि अब वे समाज के तय किए पैमानों पर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों और आत्मशांति के लिए जिएंगी।

संकट से शुरू हुआ नया सफर: जब खुद संभाला चूल्हा

डॉक्टरी छोड़ने के बाद 2023 में डोंग मिन ने एक दोस्त के मशविरे पर स्टीम्ड बन्स (पारंपरिक चीनी भाप वाले बन) की एक दुकान में निवेश किया। योजना बस इतनी थी कि वे इसमें केवल पैसा लगाएंगी और बाकी का काम अनुभवी कारीगर संभालेंगे। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दुकान शुरू होते ही मुख्य शेफ ने अचानक नौकरी छोड़ दी। नया व्यवसाय, हाथ में फंसा पैसा और सामने कोई कारीगर नहीं—किसी भी आम इंसान के लिए यह गहरा झटका हो सकता था।
डोंग मिन ने घबराने या दुकान बंद करने के बजाय एक चौंकाने वाला फैसला लिया। जिस हाथ ने 20 साल तक सर्जिकल उपकरण और पेन पकड़ा था, उस हाथ ने अब आटा गूंथना और भाप के सांचे तैयार करना शुरू कर दिया। उन्होंने खुद ही हर रेसिपी को बार-बार आजमाया, आटा गूंथने से लेकर स्टफिंग तैयार करने की बारीकियां सीखीं। धीरे-धीरे वे इस काम में माहिर हो गईं। उन्हें अहसास हुआ कि आटे को आकार देने और बन्स के भाप से पकने की खुशबू में एक ऐसा ठहराव था, जो उन्हें दो दशकों की डॉक्टरी में कभी महसूस नहीं हुआ।

अपनों का विरोध और फिर साथ

जब एक सफल महिला डॉक्टर ने बन्स की दुकान पर पसीना बहाना शुरू किया, तो सबसे पहले उनके अपने परिवार ने ही इसका कड़ा विरोध किया। परिजनों और रिश्तेदारों का मानना था कि 20 साल की डॉक्टरी, समाज का रुतबा और इतनी पढ़ाई-लिखाई के बाद सड़क पर दुकान खोलना किसी बेवकूफी से कम नहीं है।
लेकिन डोंग मिन अपने फैसले पर अडिग रहीं। उन्होंने किसी बहस में उलझने के बजाय चुपचाप अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान दिया। जैसे-जैसे उनके स्टीम्ड बन्स का स्वाद वुहान के लोगों की जुबान पर चढ़ा, दुकान पर ग्राहकों की लंबी कतारें लगने लगीं। बेटी की मेहनत, नया आत्मविश्वास और तेजी से बढ़ते कारोबार को देखकर परिवार का नजरिया भी बदल गया। आज हालात यह हैं कि उनकी बुजुर्ग मां और भाई भी गर्व से दुकान पर उनका हाथ बंटाते हैं।

शारीरिक थकान, लेकिन मन में असीम शांति

डोंग मिन का कारोबार अब इतना बढ़ चुका है कि उन्होंने इसी साल जुलाई में शहर में अपनी दूसरी शाखा का उद्घाटन भी कर दिया है। उनका यह सफर दिखाता है कि सफलता का असली पैमाना पद या रुतबा नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि है।
अपनी वर्तमान जिंदगी पर बात करते हुए डोंग मिन कहती हैं कि डॉक्टर रहते हुए उनका दिमाग हर वक्त कानूनी जटिलताओं, अस्पताल की राजनीति और दबाव से भरा रहता था, जिससे वे रातों को सो नहीं पाती थीं। अब वे दुकान पर रोज 10 से 12 घंटे लगातार खड़े रहकर पसीना बहाती हैं। शरीर थककर चूर हो जाता है, लेकिन दिन के अंत में मिलने वाली नींद गहरी और सुकून भरी होती है। उनका मानना है कि जिंदगी में किसी भी मोड़ पर खुद को नए सिरे से गढ़ा जा सकता है, बशर्ते आपके पास तनाव को अलविदा कहने और अपनी खुशियों को चुनने का साहस हो।

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