RBI के आंकड़े: सेवा निर्यात और विदेशों से भेजी गई रकम ने संभाला मोर्चा, नेट FDI बढ़कर 6.1 अरब डॉलर
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) 4.2 अरब डॉलर रहा, जो देश की GDP का 0.5 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में CAD GDP का 0.4 प्रतिशत था।
आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण कच्चे तेल, एलपीजी और उर्वरकों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इससे भारत के आयात बिल पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
व्यापार घाटा 86.1 अरब डॉलर
Q1 2026-27 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा 86.1 अरब डॉलर रहा। हालांकि, यह पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 88.9 अरब डॉलर के मुकाबले कम है।
वहीं, कंप्यूटर, बिजनेस और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं के निर्यात में मजबूती से सेवाओं से शुद्ध आय बढ़कर 51.6 अरब डॉलर हो गई, जो एक साल पहले 47.9 अरब डॉलर थी।

विदेशों से भेजी रकम में बड़ा इजाफा
निवेश आय भुगतान से जुड़ा प्राइमरी इनकम आउटफ्लो घटकर 10.5 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 13.3 अरब डॉलर था।
दूसरी ओर, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजी गई रकम यानी पर्सनल ट्रांसफर बढ़कर 42.9 अरब डॉलर हो गई। पिछले साल की समान अवधि में यह 33.2 अरब डॉलर थी।

नेट FDI इनफ्लो भी बढ़ा
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत में नेट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) इनफ्लो 6.1 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 5.2 अरब डॉलर था।
कुल मिलाकर, व्यापार घाटे के बावजूद सेवा निर्यात, विदेशों से भेजी गई रकम और FDI में बढ़ोतरी ने भारत के बाहरी क्षेत्र पर दबाव को कुछ हद तक संतुलित किया है।

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