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भारतीय खाद्य तेल बाजार में अर्जेंटीना की हिस्सेदारी में जोरदार उछाल

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विशेष कृषि एवं जिंस व्यापार रिपोर्ट: भारतीय खाद्य तेल बाजार में अर्जेंटीना का दबदबा और महाराष्ट्र में सूखे का संकट

1. भारतीय खाद्य तेल आयात: अर्जेंटीना बना देश का शीर्ष आपूर्तिकर्ता

वैश्विक जिंस बाजार में भारत की खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने के संदर्भ में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए चालू मार्केटिंग सीजन में शीर्ष निर्यातक का दर्जा हासिल कर लिया है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों का आयात करता है, जिसमें अर्जेंटीना से मुख्य रूप से क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल और क्रूड सूरजमुखी तेल का भारी उठाव किया जा रहा है।
विदित हो कि अर्जेंटीना वैश्विक स्तर पर सोयाबीन तेल का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है। इसके साथ ही, इस वर्ष अर्जेंटीना में सूरजमुखी का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक खाद्य तेल आपूर्ति में उसकी स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।
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आयात के प्रमुख आंकड़े (सीजन 2025-26)

मार्केटिंग सीजन 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) के शुरुआती दस महीनों यानी नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के ताजा व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार:
  • अर्जेंटीना की शीर्ष स्थिति: इस दस महीने की अवधि के दौरान भारत ने अर्जेंटीना से कुल 30.59 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया है। इसके साथ ही अर्जेंटीना भारत का सबसे बड़ा खाद्य तेल आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है।
  • मलेशिया दूसरे पायदान पर: पारंपरिक रूप से पाम तेल का प्रमुख निर्यातक मलेशिया 26.20 लाख टन के निर्यात के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गया है।
  • सूरजमुखी व सोयाबीन तेल का समीकरण: वर्तमान में अर्जेंटीना भारत के लिए सोयाबीन तेल का सबसे बड़ा सप्लायर और सूरजमुखी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारतीय बाजार में सूरजमुखी तेल का सबसे बड़ा निर्यातक अभी भी रूस बना हुआ है।

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमान

भारतीय बाजार में खाद्य तेलों की निरंतर बढ़ती खपत और मांग को ध्यान में रखते हुए अर्जेंटीना अपनी तिलहन फसलों के उत्पादन और पेराई क्षमता के विस्तार पर विशेष जोर दे रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 2025-26 के सीजन के लिए अर्जेंटीना के उत्पादन और निर्यात को लेकर सकारात्मक अनुमान जारी किए हैं:
  • अर्जेंटीना में सोयाबीन का कुल उत्पादन 500 लाख टन (50 मिलियन टन) रहने का अनुमान है।
  • सूरजमुखी का उत्पादन 70 लाख टन के स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में अर्जेंटीना से 61.50 लाख टन सोयाबीन तेल के निर्यात का अनुमान व्यक्त किया गया है।

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2. घरेलू कृषि संकट: महाराष्ट्र का 80% हिस्सा भीषण सूखे की चपेट में

एक तरफ जहां देश खाद्य तेलों के लिए आयात पर निर्भरता देख रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शुमार महाराष्ट्र इस समय गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। राज्य का लगभग 80 प्रतिशत भूभाग गंभीर सूखे की चपेट में आ चुका है, जिससे चालू खरीफ सत्र की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका गहरा गई है।
मानसूनी बारिश की लंबी खेंच और लंबे समय से पर्याप्त वर्षा न होने के कारण राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव बन गया है।

265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इन क्षेत्रों में जल संकट के साथ-साथ मिट्टी की नमी समाप्त हो चुकी है, जिससे खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।

खरीफ फसलों पर व्यापक असर

महाराष्ट्र देश में दलहन, तिलहन और नकदी फसलों का अग्रणी उत्पादक राज्य है। वर्तमान सूखे के कारण जिन प्रमुख खरीफ फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका है, उनमें शामिल हैं:
  • सोयाबीन व तुवर (अरहर): इन दोनों फसलों के रकबे और उपज पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ने से घरेलू खाद्य तेल और दालों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
  • कपास, गन्ना एवं मक्का: नकदी फसलों के रूप में पहचाने जाने वाले कपास और गन्ने के उत्पादन में गिरावट से किसानों की आय और संबंधित प्रसंस्करण उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

केंद्र सरकार की पहल और राहत कार्य

राज्य में बिगड़ते हालात और किसानों की बदहाली को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में राज्य की विषम परिस्थितियों का ब्योरा देते हुए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के तहत विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया था।
मुख्यमंत्री की अपील पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत एक विशेष अध्ययन दल गठित करने का निर्णय लिया है:
  • केन्द्रीय अध्ययन दल का दौरा: केंद्र द्वारा गठित यह दल महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा और राज्य सरकार के प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर फसलों को हुए नुकसान का भौतिक सत्यापन करेगा।
  • आकलन और रिपोर्ट: महाराष्ट्र के कृषि मंत्री के अनुसार, केंद्रीय टीम सूखे की गंभीरता और फसल क्षति का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशी रिपोर्ट सौंपेगी।
  • वित्तीय सहायता का वितरण: इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र द्वारा NDRF फंड से राहत पैकेज जारी किया जाएगा, जिसे सीधे प्रभावित किसानों के खातों में वितरित किया जाएगा ताकि उन्हें राहत पहुंचाई जा सके।

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