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बाढ़ में प्रिंसिपल ने 1,643 बच्चों की बचाई जान: आंखों के सामने ढहा स्कूल का पुल, 900 से ज्यादा मौतें

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Nepal Flood News: नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 919 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें अकेले नेपाल में 903 मौतें बताई जा रही हैं। वहीं, 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं।

इस भयावह आपदा के बीच नेपाल के एक स्कूल प्रिंसिपल की सूझबूझ और त्वरित फैसले ने सैकड़ों बच्चों समेत 1,643 लोगों की जान बचा ली। यह घटना उत्तरी-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल की है।

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स्कूल में मौजूद थे करीब 900 बच्चे

त्रिशूली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में करीब 1,600 बच्चे पढ़ते हैं। 26 अगस्त को जब अचानक बाढ़ आई, उस समय स्कूल खुला हुआ था। करीब 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे और शुरुआत में स्थिति सामान्य थी।

इसी दौरान स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को उनके एक दोस्त ने फोन कर बताया कि इलाके में बाढ़ आ गई है और ऊपर की ओर बसे गांव भी पानी की चपेट में आ चुके हैं।

प्रिंसिपल ने तुरंत बजवाई स्कूल की घंटी

जानकारी मिलते ही राजेंद्र दवाडी ने बिना समय गंवाए स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पता कराया कि कितनी स्कूल बसें स्कूल पहुंच चुकी हैं और कितने बच्चे अभी रास्ते में हैं।

कुछ ही देर में उन्हें जानकारी मिली कि करीब 700 बच्चे अभी पैदल या स्कूल बस से स्कूल पहुंचने वाले हैं। प्रिंसिपल ने तुरंत सभी बस ड्राइवरों को फोन कर बसों को स्कूल नहीं लाने का निर्देश दिया।

हालांकि स्कूल नदी से करीब 200 फीट की ऊंचाई पर था, लेकिन प्रिंसिपल ने खतरे को देखते हुए कोई जोखिम नहीं लिया।

आंखों के सामने ढह गया स्कूल का पुल

इसी बीच कुछ अभिभावकों ने भी प्रिंसिपल को फोन कर बताया कि बाढ़ का पानी तेजी से स्कूल की ओर बढ़ रहा है। राजेंद्र ने स्कूल की तरफ आ रही एक बस को भी तुरंत वापस भेज दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, बस के मुड़कर स्कूल के सामने बने पुल को पार करने के कुछ ही देर बाद पुल बाढ़ के पानी में बह गया। इस घटना के बाद स्कूल में अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया।

पहाड़ी पर भेजे गए सभी बच्चे

पुल के बहने के बाद प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी ने सभी शिक्षकों को बच्चों को लेकर सुरक्षित ऊंचाई यानी पहाड़ी की ओर जाने का निर्देश दिया।

शिक्षकों और कर्मचारियों ने बच्चों को पैदल सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। सभी बच्चों को बाहर निकालने और स्कूल की दोबारा जांच करने के बाद प्रिंसिपल भी पहाड़ी की ओर चले गए।

स्कूल में उस समय कुल 1,644 लोग मौजूद बताए गए, जिनमें 1,643 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, इस घटना में सोशल हिस्ट्री के शिक्षक सैंटोस परियार की बाढ़ में बहने से मौत हो गई।

30 सेकेंड में ढह गया स्कूल

राजेंद्र दवाडी ने बताया कि सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंचने के करीब 30 सेकेंड बाद स्कूल की इमारत ढह गई। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचा दिया गया है।

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प्रिंसिपल के मुताबिक, स्कूल पूरी तरह तबाह हो चुका है और स्कूल को जोड़ने वाला कनेक्टिविटी ब्रिज भी टूट गया है। ऐसे में मदद मिलने तक बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करना मुश्किल है।

भारत से मदद की अपील

राजेंद्र दवाडी खुद भी इसी स्कूल के छात्र रह चुके हैं। उन्होंने भारत से मदद की अपील करते हुए कहा कि नेपाल में आए भूकंप के बाद भारत ने स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद की थी और एक बस भी दान की थी।

अब बाढ़ में स्कूल के पूरी तरह तबाह होने के बाद उन्हें एक बार फिर मदद की उम्मीद है।

नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बीच प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी का समय पर लिया गया फैसला बच्चों और स्कूल स्टाफ के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ। खतरे को भांपकर बसों को रोकना और सभी बच्चों को सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंचाना उनकी सूझबूझ का उदाहरण है।

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