पाली |ग्रामीण बेटियों की शिक्षा को नई दिशा देने वाली संस्था एजुकेट गर्ल्स ने पाली में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित कर ‘प्रगति’ कार्यक्रम के तहत कक्षा 10 उत्तीर्ण करने वाली शिक्षार्थियों का सम्मान किया। यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और बदलाव की प्रेरक गाथाओं का उत्सव बन गया।
मुख्य अतिथि ने सराहा प्रयास
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाश चंद्र राठौड़ (जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी, पाली) ने एजुकेट गर्ल्स के पिछले 18 वर्षों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “शिक्षा एक निरंतर यात्रा है, और इन बेटियों ने कठिनाइयों को पार कर अपने सपनों को साकार किया है।”
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि संस्था आने वाले समय में अपनी पहुँच 1 करोड़ से भी अधिक शिक्षार्थियों तक बढ़ाएगी।
🎯 ‘प्रगति’ कार्यक्रम बना उम्मीद की किरण
‘प्रगति’ पहल के तहत 15–29 वर्ष आयु वर्ग की उन किशोरियों और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ा जाता है, जो किसी कारणवश पढ़ाई से दूर हो गई थीं।
- अब तक 10,210+ शिक्षार्थियों ने इस कार्यक्रम से दोबारा पढ़ाई शुरू कर कक्षा 10 पास की
- इस समारोह में 13 टॉपर्स को 70% से अधिक अंक प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया
- कार्यक्रम में 750+ शिक्षार्थियों, 86 प्रेरकों और टीम बालिका स्वयंसेवकों की भागीदारी रही
संघर्ष से सफलता तक का सफर
सम्मानित बेटियों की कहानियाँ प्रेरणा से भरी रहीं—
- घरेलू जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखना
- सामाजिक बाधाओं को चुनौती देना
- वर्षों बाद शिक्षा की ओर लौटना
कई छात्राओं के लिए यह उनका पहला सार्वजनिक मंच था, जिसने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी।
🤝 ‘मेरा गाँव, मेरी समस्या, मैं ही समाधान’
कार्यक्रम में टीम बालिका के स्वयंसेवकों और प्रेरकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे घर-घर जाकर परिवारों को जागरूक कर लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित की जाती है।
शिक्षा से सशक्तिकरण की ओर
कार्यक्रम में मौजूद महिला सशक्तिकरण जिला हब की जेंडर विशेषज्ञ राजश्री ने भी भाग लिया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि “एक लड़की की शिक्षा पूरे परिवार और समाज को सशक्त बनाती है।”


Leave a Reply