रामकिशोर दाधीच और भगवान माली एंड पार्टी ने भजनों से बांधा समां, 15 क्विंटल आटे से तैयार हुआ विशेष चूरमा; संत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने भव्य प्रवेश द्वार का किया लोकार्पण
बिराई/बावड़ी। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की बीज के अवसर पर राजस्थान के लोक देवता बाबा रामदेव महाराज के जन्मोत्सव को लेकर बावड़ी उपखंड क्षेत्र के बिराई स्थित चटाला धाम में रविवार को भव्य मेले का आयोजन हुआ। ब्रह्म मुहूर्त में मंगल आरती के साथ शुरू हुए मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही चटाला धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं और वाहनों की रेलमपेल नजर आई। चारों ओर “रामसा पीर की जय” और “बाबा रामदेव जी महाराज की जय” के जयकारे गूंजते रहे।
डीजे की धुन पर झूमते हुए पहुंचे श्रद्धालु
चटाला धाम में आयोजित मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग डीजे की धुनों पर नाचते-गाते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
नर-नारी बाबा रामदेव महाराज के दरबार में पहुंचकर शीश नवाते, प्रसाद चढ़ाते और नारियल फोड़कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते नजर आए। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा चटाला धाम भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

संत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने किया भव्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण
मेले के दौरान चटाला धाम के विकास कार्यों को भी नई गति मिली। जोधपुर सूरसागर बड़ा रामद्वारा के संत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने भामाशाह द्वारा जोधपुर के पत्थर से निर्मित भव्य प्रवेश द्वार का फीता काटकर लोकार्पण किया।
इस अवसर पर संत डॉ. रामप्रसाद महाराज ने कहा कि भगवत कृपा के बिना धन का उचित और सही स्थान पर सदुपयोग संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग कार्यों में धन खर्च करते हैं, लेकिन परमात्मा की इच्छा और कृपा के बिना सत्कर्म में धन लगाना संभव नहीं होता।

उन्होंने कहा कि भक्ति करने से मनुष्य के भीतर शक्ति बढ़ती है और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। बाबा रामदेव की पवित्र भूमि पर भागवत चर्चा और सत्कर्म के कार्य निरंतर होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व जन्मों के अच्छे कर्मों और भगवान की कृपा के बिना सत्कर्म के कार्यों में धन लगाना संभव नहीं है।
भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण को चटाला धाम की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने इसके निर्माण पर खुशी जताई।
रामकिशोर दाधीच और भगवान माली ने भजनों से बांधा समां
चटाला धाम में आयोजित एक दिवसीय भजन संध्या में जोधपुर के प्रसिद्ध लोक भजन गायक रामकिशोर दाधीच तथा भगवान माली एंड पार्टी ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भजन संध्या में “रुनझुन रुनझुन बाजे घोड़ा रा पोड़ जी…”, “खम्मा खम्मा ओ अजमाल जी का कवरा…” सहित बाबा रामदेव महाराज की महिमा से जुड़े अनेक भजनों की प्रस्तुति दी गई। भजनों के दौरान श्रद्धालु तालियों के साथ झूमते नजर आए और पूरा पांडाल भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा।
15 क्विंटल आटे से तैयार हुआ विशेष चूरमा
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का भी आयोजन किया गया। इस दौरान राजस्थान की प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा की प्रसादी तैयार कर श्रद्धालुओं को वितरित की गई।
विशेष रूप से तैयार किए गए चूरमे के लिए करीब 15 क्विंटल आटे का उपयोग किया गया। चूरमा बनाने की जिम्मेदारी राजस्थान के प्रसिद्ध चूरमा विशेषज्ञ मेघाराम देवड़ा ने संभाली। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की।
पुलिस व्यवस्था रही मुस्तैद
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस के जवान तैनात रहे। खेड़ापा थाना के सहायक उप निरीक्षक चिमनाराम के नेतृत्व में पुलिसकर्मी व्यवस्थाओं को संभालते नजर आए।
पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने के बावजूद पुलिस ने यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखा। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए भोपालगढ़ वृत्ताधिकारी गुलाब राम भी चटाला धाम पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बाबा रामदेव महाराज के दर्शन भी किए।
पुलिस, मेला समिति और ग्रामीणों के सहयोग से मेले का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का संगम बना चटाला धाम
भादवा की बीज पर चटाला धाम में लगा मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां भक्ति, लोक संस्कृति, सेवा और सामाजिक सहभागिता का भी संगम देखने को मिला। बाबा रामदेव महाराज के जयकारों, लोक भजनों और महाप्रसादी के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

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