अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर ईरान संकट को लेकर दबाव में नजर आ रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर जारी गतिरोध के बीच अमेरिका सैन्य कार्रवाई के नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं तो अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत कर सकता है।

पेंटागन ने तैयार किए नए हमले के विकल्प
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए कई योजनाओं का ड्राफ्ट तैयार किया है। इससे पहले अप्रैल में सीजफायर के दौरान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को रोक दिया गया था, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया है।
अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने भी संकेत दिया है कि सेना के पास तनाव बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई के कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें ईरान के सैन्य ठिकानों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हवाई हमले शामिल बताए जा रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे संकट का केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला रहे, जबकि ईरान इस पर दबाव की रणनीति अपनाता दिख रहा है।
चीन यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का “मुंहतोड़ जवाब” देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि तेहरान कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण उसे वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है।
अमेरिकी सेना की भारी तैनाती
मिडिल-ईस्ट में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय क्षेत्र में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, दो विमानवाहक पोत, कई युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज को लेकर भी चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं को सुरक्षित करने के लिए विशेष सैनिक भेजे जा सकते हैं।
तेल की कीमतों में बढ़ी चिंता
ईरान-अमेरिका तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में संकट गहराने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं, खासकर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो पश्चिम एशिया में बड़ा भू-राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा।

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