United States ने ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में कथित मदद करने के आरोप में चीन, हांगकांग और अन्य देशों की 10 कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार को इन प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि संबंधित कंपनियां और कारोबारी ईरान को शाहिद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए हथियारों के पुर्जे और कच्चा माल उपलब्ध कराने में शामिल थे।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द ही चीन दौरे पर जाने वाले हैं। ट्रंप का यह दौरा चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ अहम वार्ता के लिए प्रस्तावित है। वहीं दूसरी ओर, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठप पड़े हुए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने बयान में कहा कि वह ईरान के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने के लिए तैयार है। विभाग का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य तेहरान को अपनी हथियार उत्पादन क्षमता को दोबारा मजबूत करने से रोकना है।

अमेरिका ने विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को भी चेतावनी दी है कि यदि वे ईरान के अवैध व्यापार या हथियार खरीद नेटवर्क में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। ट्रेजरी विभाग ने संकेत दिए हैं कि चीन की स्वतंत्र “टीपॉट” तेल रिफाइनरियों से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर भी सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
प्रतिबंधित कंपनियों में Yushita Shanghai International Trade Co. Ltd. का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। अमेरिका का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान को चीन से हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने में सहायता की। इसके अलावा दुबई स्थित Elite Energy FZCO पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने खरीद गतिविधियों में शामिल हांगकांग की एक फर्म को लाखों डॉलर ट्रांसफर किए।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के ये प्रतिबंध अभी सीमित दायरे में हैं और ईरान वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं के जरिए अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिका ने अभी तक उन बड़े चीनी बैंकों को निशाना नहीं बनाया है, जो कथित तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं।

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