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होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकेबंदी: दुनिया के सामने 3 बड़े संकट, क्या अमेरिका-ईरान टकराव में कूदेगा चीन?

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाले संकट को जन्म दे दिया है।

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 वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां नाकेबंदी का मतलब है कि तेल की कीमतों में भारी उछाल और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराना तय है।

टकराव के केंद्र में चीन

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका बेहद अहम हो गई है। चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और उसने साफ कर दिया है कि वह अपने ऊर्जा हितों से समझौता नहीं करेगा। ऐसे में अगर अमेरिका चीनी जहाजों को रोकने की कोशिश करता है, तो यह तनाव सीधे अमेरिका-चीन टकराव में बदल सकता है।

 ग्रे जोन रणनीति से बढ़ेगा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीधे युद्ध में नहीं उतरेगा, लेकिन वह “ग्रे जोन” रणनीति अपना सकता है। इसके तहत वह सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति बाधित कर सकता है, जिससे पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। साथ ही दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाकर स्थिति को और जटिल बना सकता है।

बाब-अल-मंदेब पर भी खतरा

खतरा सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। हूती विद्रोही बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को निशाना बना सकते हैं। यह मार्ग लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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 यूरोप पर सबसे ज्यादा असर

यूरोप इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है। तेल आपूर्ति बाधित होने पर उसे वैकल्पिक मार्ग अपनाने होंगे, जिससे लागत और महंगाई दोनों बढ़ेंगी। जहाजों को अफ्रीका के लंबे रास्ते से गुजरना पड़ सकता है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा।

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