ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के रक्षा बजट को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक प्रस्ताव पेश किया है। शुक्रवार को जारी इस प्रस्ताव के तहत वित्त वर्ष 2027 के लिए रक्षा खर्च में 500 अरब डॉलर की भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है।
इस प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका का कुल रक्षा बजट 2026 के लगभग एक ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इस बड़े बजट का उद्देश्य न केवल सैन्य ताकत को मजबूत करना है, बल्कि आधुनिक तकनीकों और उन्नत रक्षा प्रणालियों में निवेश को भी बढ़ावा देना है।

बजट में “गोल्डन डोम” जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम के विकास और तैनाती के लिए विशेष फंडिंग का प्रावधान किया गया है। माना जा रहा है कि यह सिस्टम अमेरिका की मिसाइल रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा। इसके साथ ही नए युद्धपोतों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है, जिससे अमेरिकी नौसेना की ताकत में इजाफा होगा और वैश्विक समुद्री उपस्थिति और मजबूत होगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव में केवल रक्षा क्षेत्र पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में कटौती के संकेत भी दिए गए हैं। नासा के बजट में 5.6 अरब डॉलर की कटौती का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा गैर-रक्षा विवेकाधीन खर्च में 10 प्रतिशत की कमी की बात भी कही गई है, जो सरकार के अन्य कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकती है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन को विदेश नीति में कई जटिल और जोखिम भरे फैसले लेने पड़ रहे हैं। प्रशासन ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा सकता है। वहीं, देश के भीतर आम जनता इस संघर्ष के आर्थिक प्रभावों का सामना कर रही है, खासकर गैस की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ा है।
इस बजट प्रस्ताव को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। हाल ही में खर्च को लेकर मतभेदों के कारण अमेरिका को अपने इतिहास के सबसे लंबे सरकारी शटडाउन का सामना करना पड़ा था, जिससे यह स्पष्ट है कि इस बार भी इस प्रस्ताव पर तीखी बहस हो सकती है।

रक्षा बजट में प्रस्तावित वृद्धि के तहत सैन्य कर्मियों के वेतन में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी शामिल है, जिससे सेना के मनोबल को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, पेंटागन ने पहले ही ईरान युद्ध के खर्च के लिए 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है, हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक इस पर आधिकारिक अनुरोध कांग्रेस के सामने पेश नहीं किया है।
कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव का संकेत देता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इस प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी देती है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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