पेरिस में अमेरिका और चीन के बीच अहम व्यापार वार्ता की शुरुआत हो गई है। इस बैठक का नेतृत्व अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सचिव Scott Bessent और चीन की ओर से उपप्रधानमंत्री He Lifeng कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की संभावित चीन यात्रा और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ होने वाली संभावित शिखर वार्ता की तैयारियों से भी जुड़ी हुई है।
International Desk: दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—United States और China—के बीच महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता रविवार को Paris में शुरू हुई। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापारिक तनाव को कम करने और भविष्य की रणनीति तय करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के नतीजे आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

इस अहम बैठक में अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सचिव Scott Bessent और चीन की ओर से उपप्रधानमंत्री He Lifeng नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों नेता अपने-अपने देशों की आर्थिक नीतियों, व्यापारिक चुनौतियों और संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह वार्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच संभावित शिखर वार्ता की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच चीन की यात्रा कर सकते हैं। यदि यह दौरा तय होता है, तो यह उनके दूसरे कार्यकाल में चीन की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में बीजिंग गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की थी।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। खासकर टैरिफ युद्ध ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को प्रभावित किया है। अमेरिका ने कई चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए, जबकि चीन ने भी जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए। इस स्थिति का असर न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर भी इसका असर देखने को मिला।
हालांकि पिछले साल Busan, South Korea में हुई एक महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने एक साल के लिए व्यापार युद्ध को रोकने पर सहमति जताई थी। इस समझौते का उद्देश्य बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने का रास्ता निकालना था। इसके बावजूद कई ऐसे मुद्दे हैं जो अभी भी दोनों देशों के बीच मतभेद का कारण बने हुए हैं।
इन विवादित मुद्दों में अमेरिकी टैरिफ जांच, दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार असंतुलन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्नत तकनीकों, सेमीकंडक्टर उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव का कारण बनती रही है।
इस बैठक में केवल व्यापारिक विषय ही नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। खासकर मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति और Iran से जुड़े तनाव को लेकर भी बातचीत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार की स्थिरता को लेकर दोनों देशों की चिंताएं साझा हैं।

हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि दुनिया के कई देशों को मिलकर वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चीन सहित अन्य देशों को Strait of Hormuz को सुरक्षित और खुला रखने के लिए नौसैनिक सहयोग देना चाहिए। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
फ्रांसीसी बैंक Natixis के अर्थशास्त्री Gary Ng के अनुसार पेरिस में हो रही यह बैठक ट्रंप और शी जिनपिंग के संभावित शिखर सम्मेलन से पहले सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताओं में से एक हो सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों देश अपने मतभेदों को किस तरह संभालते हैं और क्या वे सहयोग के नए रास्ते तलाश पाते हैं।
इससे पहले चीन के विदेश मंत्री Wang Yi भी संकेत दे चुके हैं कि यह साल अमेरिका और चीन के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों का एजेंडा पहले ही तय किया जा चुका है और आने वाले महीनों में कई अहम कूटनीतिक मुलाकातें हो सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पेरिस में चल रही यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका और चीन के संबंधों में सुधार हो सकता है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच नए सहयोग का रास्ता खोलती है या फिर पुराने मतभेद ही आगे भी हावी रहते हैं।

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