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IRAN WAR: ईरान से जुड़े हमले में फ्रांस को बड़ा झटका, ड्रोन अटैक में 1 सैनिक की मौत, कई घायल

Iran War: बगदाद से आई रिपोर्ट्स के अनुसार इराक में हुए कई हमलों की जिम्मेदारी ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ नामक समूह ने ली है। बताया जाता है कि इस संगठन में ईरान समर्थित सशस्त्र गुट शामिल हैं।

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Iran War: इराक में ड्रोन हमले में फ्रांस के सैनिक की मौत, कई घायल; मैक्रों ने कहा—‘अस्वीकार्य’

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के उत्तरी कुर्द क्षेत्र में हुए एक ड्रोन हमले में फ्रांस के एक सैनिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य सैनिक घायल हो गए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि ऐसे हमलों को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।

राष्ट्रपति मैक्रों के अनुसार इस हमले में फ्रांसीसी सेना के चीफ वारंट ऑफिसर अरनॉड फ्रिओन की मौत हो गई। फ्रिओन उस समय इराक के एरबिल क्षेत्र में तैनात थे, जहां फ्रांसीसी सैनिक आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान के तहत अपनी सेवाएं दे रहे थे। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि इराक में फ्रांस की सैन्य मौजूदगी केवल आतंकवादी संगठनों से लड़ने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए है, न कि किसी क्षेत्रीय युद्ध का हिस्सा बनने के लिए।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के बहाने अंतरराष्ट्रीय सैनिकों पर हमले करना पूरी तरह से गलत है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए मृत सैनिक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल सैनिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

इराक बनता जा रहा है दूसरा युद्धक्षेत्र

विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब इराक में भी दिखाई देने लगा है। हाल के महीनों में इराक में कई सैन्य और कूटनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि यह देश धीरे-धीरे एक “दूसरे युद्धक्षेत्र” में बदल सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, एरबिल में स्थित अमेरिकी कांसुलेट, बगदाद में अमेरिकी दूतावास और बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास मौजूद सैन्य अड्डों पर भी हमलों की कोशिशें की गई हैं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है।

इस बीच ईरान समर्थित बताए जाने वाले एक समूह अशाब अहल अल-कहफ ने भी एक बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है कि इराक और पूरे क्षेत्र में फ्रांस से जुड़े सैन्य ठिकाने अब उनके निशाने पर हो सकते हैं। इस चेतावनी ने पश्चिमी देशों के लिए चिंता और बढ़ा दी है।

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सैन्य अड्डों पर लगातार हमले

फ्रांसीसी सेना ने एक दिन पहले जानकारी दी थी कि इराक में स्थित एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया गया था, जिसमें छह सैनिक घायल हो गए थे। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये वही सैनिक हैं जिनका जिक्र राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने बयान में किया है या यह अलग घटना थी।

सैन्य अधिकारियों के अनुसार हमले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और हमले की जांच भी शुरू कर दी गई है। ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सैन्य बलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इटली के सैन्य अड्डे पर भी हमला

फ्रांस के अलावा इटली ने भी दावा किया है कि एरबिल में उसके सैन्य अड्डे को भी हवाई हमले का निशाना बनाया गया था। यह अड्डा नाटो (NATO) मिशन से जुड़ा हुआ है और यहां कई देशों के सैनिक तैनात हैं।

हालांकि इटली के अधिकारियों ने कहा है कि इस हमले में किसी भी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। फिर भी इस घटना ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में तैनात अंतरराष्ट्रीय सैन्य बलों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

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फ्रांस की संभावित सैन्य तैयारी

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए फ्रांस ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा है कि यदि क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो फ्रांस अपने विमानवाहक पोत “चार्ल्स डी गॉल” को भूमध्यसागर में तैनात कर सकता है।

इसके अलावा फ्रांस साइप्रस में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणाली भेजने पर भी विचार कर रहा है, ताकि क्षेत्र में मौजूद अपने सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

बढ़ते संघर्ष के संभावित परिणाम

रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल इन देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इराक, सीरिया और लेबनान जैसे देश पहले ही कई तरह के क्षेत्रीय संघर्षों से प्रभावित हैं। ऐसे में यदि यहां अंतरराष्ट्रीय सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहते हैं तो यह स्थिति बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव का रूप ले सकती है।

कुल मिलाकर, इराक में फ्रांसीसी सैनिक की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव अब धीरे-धीरे और खतरनाक दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां इस स्थिति को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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