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भिवाड़ी–धारूहेड़ा जलभराव समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा निर्णय

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग–919 पर स्थित भिवाड़ी–धारूहेड़ा क्षेत्र में लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या को हल करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई केंद्रीय और राज्य सरकारों के मंत्री शामिल हुए, जिन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

बैठक में भिवाड़ी के घरेलू सीवरेज जल और वर्षा जल के प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दिशा में यह निर्णय लिया गया कि भिवाड़ी का घरेलू अपशिष्ट जल अब 34 मिलियन लीटर प्रति दिन (MLD) क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उपचारित किया जाएगा, जो मार्च 2026 तक कार्यान्वित हो जाएगा। वहीं, औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार 6 MLD क्षमता वाले सीईटीपी (कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) द्वारा किया जाएगा, जिसे ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) मानकों के अनुसार उन्नत किया गया है। उपचारित जल को पाइपलाइन के माध्यम से सराय खुर्द बांध भेजा जाएगा, ताकि इसका पुन: उपयोग सिंचाई और उद्योगों में हो सके।

इसके अतिरिक्त, यह भी निर्णय लिया गया कि केवल उन जल उपचारित जल को ही मसानी बैराज में प्रवाहित किया जाएगा, जो स्वच्छ जल मानकों पर खरा उतरते हों। राजस्थान और हरियाणा सरकारें संयुक्त रूप से जल की गुणवत्ता की निगरानी करेंगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जलभराव समस्या के स्थायी समाधान हेतु लगभग 6 किलोमीटर लंबी ड्रेन के निर्माण के लिए समग्र अध्ययन कराया जाए, जिसका अनुमानित बजट ₹150 करोड़ होगा। इस परियोजना में राजस्थान और हरियाणा सरकारें ₹25–25 करोड़ का योगदान देंगी, जबकि शेष राशि एनएचएआई द्वारा वहन की जाएगी। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ₹25 करोड़ की राशि देने की सहमति प्रदान की।

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