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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के धर्मांतरण-विरोधी कानून पर राज्य सरकार से जवाब मांगा

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जयपुर | राजस्थान के नए धर्मांतरण-विरोधी कानून, राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिशेध अधिनियम, 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की याचिका पर यह आदेश दिया, जिसमें इस कानून को संविधान के खिलाफ और कई मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में चुनौती दी गई है।

इससे पहले, राज्य सरकार के खिलाफ दशरथ कुमार, एम हुजैफा और कैथोलिक वेलफेयर सोसाइटी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में इस कानून की कई धाराओं को अनुचित और असंवैधानिक बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून न केवल व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता पर सरकारी नियंत्रण थोपता है, बल्कि पुलिस को अत्यधिक दखल देने का अधिकार भी देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इन याचिकाओं पर जवाब मांगा है और मामले को अन्य समान मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, हरियाणा और झारखंड के समान कानून भी शामिल हैं।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने बताया कि मामले पर पहले ही राज्य सरकार से कई बार जवाब मांगा जा चुका है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

वही एम हुजैफा ने इस कानून की धारा 5(6), 10(3), 12 और धारा 13 को चुनौती दी है इसी तरह कैथोलिक वेलफेयर सोसाइटी ने भी कानून की धाराओं के चुनौती दी है इन तीनो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार से जवाब मांग चुका है

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