न बारूद की गंध, न सायरन का खौफ: जानिए दुनिया के इन शांत देशों की सुरक्षा का असली राज
आज जब दुनिया के कई हिस्से जंग, बारूद और मिसाइलों के साए में जी रहे हैं, तब कुछ ऐसे मुल्क भी हैं जहाँ की हवा में खौफ नहीं, बल्कि सुकून घुला है। एक तरफ रूस-यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया है, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। लोग डर के साए में हैं और हर नए दिन के साथ एक अज्ञात भय का सामना करते हैं। लेकिन इसी अशांत और उथल-पुथल भरी धरती पर कुछ ऐसे छोटे मुल्क भी मौजूद हैं, जहाँ जिंदगी पूरी तरह तनावमुक्त और शांति के साथ गुजर रही है। इन देशों ने साबित किया है कि सुरक्षा हमेशा घातक हथियारों या ताकतवर फौजों की मोहताज नहीं होती।

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लिकटेंस्टीन: 1868 से बिना सेना के महफूज मुल्क
यूरोप के दिल में स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के खूबसूरत पहाड़ों के बीच बसा लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) शांति का सबसे बड़ा प्रतीक है। आधुनिक इतिहास में इस छोटे से देश को कभी किसी बड़े विदेशी सैन्य हमले का सामना नहीं करना पड़ा। यहाँ की सबसे हैरतअंगेज बात यह है कि इस देश के पास कोई स्थायी सेना तक नहीं है। साल 1868 में लिकटेंस्टीन ने अपनी सेना को हमेशा के लिए भंग कर दिया था। तब से लेकर आज तक, इस देश ने अंतरराष्ट्रीय विवादों से खुद को पूरी तरह अलग रखा और कड़े तटस्थता (Neutrality) के सिद्धांत पर अमल किया। यूरोप में कई बड़े विनाशकारी युद्ध लड़े गए, लेकिन लिकटेंस्टीन अपनी समझदार कूटनीति के दम पर हर टकराव से खुद को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहा।
सैन मैरिनो और अंडोरा: कूटनीति बनी सुरक्षा कवच
लिकटेंस्टीन की तरह सैन मैरिनो भी यूरोप का एक बेहद अनोखा मुल्क है। पूरी तरह से इटली की सीमाओं से घिरा यह देश दुनिया के सबसे पुराने गणराज्यों में गिना जाता है। इसका बेहद छोटा आकार और आक्रामक विदेश नीति से पूरी दूरी ही इसकी ढाल बन गई। सैन मैरिनो ने हमेशा संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी, जिसके चलते यह बड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों से हमेशा अछूता रहा।
इसी कड़ी में एक और नाम अंडोरा (Andorra) का आता है, जो फ्रांस और स्पेन के बीच पाइरेनीज पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में बसा है। ऊंचे पहाड़ों से घिरे होने की वजह से अंडोरा की भौगोलिक स्थिति सामरिक हमलों के लिहाज से बेहद दुर्गम है। अंडोरा ने अपने दोनों बड़े पड़ोसियों के साथ हमेशा दोस्ताना और शांतिपूर्ण रिश्ते कायम रखे। इन ऐतिहासिक संधियों और सकारात्मक तालमेल के कारण यहाँ के बाशिंदों को कभी बड़े युद्धों की विभीषिका नहीं झेलनी पड़ी।
आखिर कैसे कायम रही यह शांति?
इन देशों की लंबी शांति के पीछे चार मुख्य स्तंभ काम करते हैं—छोटा आकार, प्राकृतिक सुरक्षा देने वाली भौगोलिक स्थिति, आक्रामक महत्वाकांक्षाओं से रहित कूटनीति और पड़ोसियों के साथ अटूट शांतिपूर्ण संबंध। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इन मुल्कों ने अपने इतिहास में कभी कोई आंतरिक या राजनीतिक तनाव नहीं देखा, लेकिन इन्होंने कभी किसी दूसरे के झगड़े में दखल नहीं दिया और न ही किसी को अपने यहाँ दखल देने की वजह दी। बारूद के ढेर पर बैठी आज की दुनिया में लिकटेंस्टीन, सैन मैरिनो और अंडोरा जैसे देश एक मिसाल हैं कि सूझबूझ और शांतिपूर्ण नीतियों से बड़ी से बड़ी जंग से दूर रहा जा सकता है।

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