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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर फोकस, जनजीवन पटरी पर लाने में जुटी सरकार

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तबाही के एक सप्ताह बाद राहत से आगे बढ़ा अभियान, प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की तैयारी तेज

काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद अब सरकार और स्थानीय प्रशासन का पूरा फोकस राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर है। भीषण प्राकृतिक आपदा को एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को धीरे-धीरे सामान्य करने की कवायद शुरू कर दी गई है। बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,252 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

आपदा के बाद कई इलाकों में मकान, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के साथ-साथ उनके घरों और बुनियादी सुविधाओं को फिर से खड़ा करने की बड़ी चुनौती है।

इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक तबाही में से एक

विदुर नगर पालिका के मेयर राजन श्रेष्ठ ने मीडिया से बातचीत में आपदा की भयावहता का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल के लोगों ने अपने जीवन में प्राकृतिक आपदा से इतनी व्यापक तबाही पहले कभी नहीं देखी।

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उन्होंने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन से नगर पालिका का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। 13 वार्डों में से 10 वार्ड पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

मेयर के मुताबिक, प्रभावित लोगों के लिए नगर पालिका क्षेत्र में 17 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां फिलहाल 3,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित परिवारों की जरूरतों का आकलन भी किया जा रहा है।

अब राहत के साथ पुनर्निर्माण पर जोर

प्रारंभिक चरण में प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान बचाना, प्रभावितों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाना तथा लापता लोगों की तलाश करना रहा। अब हालात में कुछ सुधार के साथ सरकार और स्थानीय प्रशासन ने पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

बाढ़ में नष्ट हुई सार्वजनिक संपत्तियों की बहाली, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और प्रभावित परिवारों को दोबारा सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों का आकलन कर नुकसान के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

भारत की त्वरित मदद के लिए जताया आभार

आपदा के दौरान भारत की ओर से मिली सहायता को लेकर विदुर नगर पालिका के मेयर राजन श्रेष्ठ ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से आभार जताया।

उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत ने नेपाल का साथ दिया है। मेयर ने कहा कि भारत शुरुआत से ही नेपाल का सच्चा मित्र रहा है और मुश्किल समय में हमेशा मदद के लिए आगे आया है।

उन्होंने 2015 के विनाशकारी भूकंप का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय की तरह इस बार भी भारत सरकार की ओर से राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।

हजारों लोगों के सामने घर लौटने की चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हजारों परिवारों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित रूप से अपने घरों में वापस लौटना है। कई स्थानों पर मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और सड़क तथा संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं।

ऐसे में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित लोगों को जल्दबाजी में असुरक्षित स्थानों पर वापस न भेजा जाए। साथ ही जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उनके लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा।

सामान्य जनजीवन बहाल करना सरकार की प्राथमिकता

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने अब राहत अभियान को पुनर्वास और पुनर्निर्माण से जोड़ने की चुनौती है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, आवास और अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के साथ लोगों को आर्थिक रूप से दोबारा खड़ा करने की जरूरत है।

फिलहाल प्रशासन का लक्ष्य प्रभावित लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और चरणबद्ध तरीके से जनजीवन को सामान्य स्थिति में वापस लाना है। इस आपदा के बाद नेपाल के सामने पुनर्निर्माण की एक बड़ी चुनौती खड़ी है, जिसमें सरकार के साथ स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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