Advertisement

बिना तटों वाला रहस्यमयी समंदर: वैज्ञानिक भी हैरान, जमीन छुए बिना कैसे बहता है यह पानी?

blank
सरगासो सागर: दुनिया का इकलौता समंदर जिसका कोई किनारा नहीं, जानिए पानी के इस अनोखे चक्रव्यूह का सच
जब भी समंदर या दरिया की बात होती है, तो जेहन में सबसे पहले रेतीले किनारे, टकराती लहरें और क्षितिज से मिलती जमीन का अक्स उभरता है। किसी भी जलक्षेत्र की पहचान उसकी तटरेखा से तय मानी जाती है। मगर हमारी धरती पर एक ऐसा जलक्षेत्र भी मौजूद है जो भूगोल की इस बुनियादी परिभाषा को पूरी तरह नकार देता है। उत्तरी अटलांटिक महासागर के ठीक दरमियान फैला ‘सारगासो सागर’ (Sargasso Sea) दुनिया का इकलौता ऐसा समंदर है, जिसकी कोई जमीनी सीमा या तटरेखा नहीं है। यह किसी मुल्क, द्वीप या चट्टान को नहीं छूता, बल्कि अथाह महासागर के बीच अपने-आप में एक मुकम्मल समंदर बनकर मौजूद है।
सदियों से यह इलाका जहाजी मल्लाहों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल और हैरत का सबब रहा है। कभी इसे शापित समझकर जहाजों का कब्रिस्तान कहा गया, तो कभी इसे महासागर का सबसे शांत और जादुई हिस्सा माना गया।
blank

AI GENERATE IMAGE

पानी के चक्रव्यूह से बनी सरहदें

अगर किसी सागर के पास जमीन का कोई किनारा नहीं है, तो सवाल उठता है कि फिर इसका वजूद और दायरा कैसे तय होता है? कुदरत ने इस समंदर की सीमाएं मिट्टी या पत्थरों से नहीं, बल्कि तेज रफ्तार समुद्री धाराओं से बांधी हैं। यह समंदर चारों तरफ से बहने वाली चार विशालकाय समुद्री धाराओं के घेरे में महफूज है:
  1. पश्चिम में: गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream)
  2. उत्तर में: नॉर्थ अटलांटिक करंट (North Atlantic Current)
  3. पूर्व में: कैनरी करंट (Canary Current)
  4. दक्षिण में: नॉर्थ अटलांटिक इक्वेटोरियल करंट (North Atlantic Equatorial Current)
ये चारों ताकतवर धाराएं मिलकर घड़ी की सुई की दिशा में घूमने वाला एक विशालकाय चक्रवाती घेरा (Ocean Gyre) बनाती हैं। धाराओं का यह घेरा बाहर के तूफानी पानी को भीतर नहीं आने देता, जिसके चलते इन सीमाओं के बीच मौजूद पानी हैरतअंगेज रूप से बेहद शांत, स्थिर और ठहरा हुआ रहता है। चूंकि यह दायरा समुद्री हवाओं, तापमान और पानी के बहाव पर निर्भर करता है, इसलिए मौसम और मौसमी बदलावों के साथ इस सागर की सीमाएं थोड़ी-बहुत फैलती और सिकुड़ती रहती हैं।

शीशे की तरह पारदर्शी और गहरा नीला पानी

सारगासो सागर की सबसे विस्मयकारी खूबियों में से एक है इसका अस्वाभाविक रूप से गहरा नीला और पारदर्शी पानी। महासागरों के अमूमन मटमैले या लहरदार पानी के उलट, यहां पानी इतना साफ है कि ऊपर खड़े होकर 50 से 60 मीटर की गहराई तक चीजें साफ देखी जा सकती हैं। इसकी वजह यह है कि तट न होने के कारण नदियों से बहकर आने वाली गाद, मिट्टी या जैविक कचरा यहां तक नहीं पहुंच पाता।
इस अत्यधिक पारदर्शिता और ठहराव की वजह से यह समंदर बाहर से देखने पर किसी विशालकाय नीले कांच की मानिंद दिखता है, जिसके शांत गर्भ में एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र सांस ले रहा है।
blank

AI GENERATE IMAGE

बिना मिट्टी के उगने वाली ‘जादुई घास’

इस समंदर का नाम पुर्तगाली जुबान के लफ्ज ‘सारगासो’ से निकला है, जिसका मतलब एक खास किस्म की समुद्री घास होता है। इस सागर की सतह पर ‘सारगासम’ (Sargassum) नामक सुनहरी-भूरी शैवाल (Algae) के मीलों लंबे तैरते हुए मैदान फैले रहते हैं।
इस वनस्पति की सबसे अनूठी बात यह है कि इसे उगने और पनपने के लिए किसी समुद्री तल, चट्टान या तलहटी की मिट्टी की दरकार नहीं होती। यह पूरी तरह से पानी की सतह पर ही जनमती है, वहीं बढ़ती है और एक-दूसरे से उलझकर पानी पर एक प्राकृतिक गद्दे की तरह बिछ जाती है।
blank

black sand Caribbean beach in Dominica covered with Sargassum grass. Drone image.

जहाजों के खौफ से लेकर जीवों की पनाहगाह तक

पुराने जमाने के नाविकों के बीच सारगासो सागर को लेकर कई डरावने किस्से मशहूर थे। 15वीं और 16वीं सदी में पाल वाले लकड़ी के जहाज अक्सर यहां की शांत हवाओं और शैवाल के घने जालों में हफ्तों तक फंसे रह जाते थे। पीने का पानी और राशन खत्म होने से चालक दल दम तोड़ देता था, जिससे नाविक इसे ‘खोए हुए जहाजों की पनाहगाह’ मानने लगे थे। कई पौराणिक कथाओं में यह भी दर्ज किया गया कि इस घास में कोई दानवी ताकत जहाजों को खींच लेती है।
हालांकि, आधुनिक विज्ञान ने इन मनगढ़ंत मिथकों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। आज मरीन बायोलॉजिस्ट्स की नजर में यह तैरती घास किसी अभिशाप नहीं, बल्कि जलीय जीवन के लिए कुदरती वरदान है। यह तैरता हुआ जंगल कई लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों के लिए भोजन, सुरक्षा और प्रजनन की मुफीद जगह है। नन्हें समुद्री कछुए शिकारी जीवों से बचने के लिए इसी घास की आड़ लेते हैं। दुर्लभ सारगासम मछलियां, सफेद केकड़े, श्रिंप और मीठे पानी की ईल (Anguilla) मछलियां महाद्वीपों से हजारों मील का सफर तय करके यहीं प्रजनन के लिए पहुंचती हैं।
सारगासो सागर कुदरत का वह जीता-जागता करिश्मा है जो हमें सिखाता है कि समंदर सिर्फ तटों के मोहताज नहीं होते; जल की अपनी धाराएं भी एक पूरी दुनिया की सीमा तय करने की ताकत रखती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *