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Gen Z के सवालों पर गुरुदेव का मंत्र: सिचुएशनशिप नहीं, रिश्तों में स्पष्टता; FOMO से निकलकर जिएं ZOMO

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कोरियाई हार्ट से सिचुएशनशिप तक: Gen Z के हर सवाल का गुरुदेव रवि शंकर ने दिया जवाब

नई दिल्ली। आज की युवा पीढ़ी तकनीक और सोशल मीडिया से पहले की किसी भी पीढ़ी की तुलना में अधिक जुड़ी हुई है, लेकिन इसके साथ ही अकेलापन, ओवरथिंकिंग, रिश्तों की उलझन, FOMO, ध्यान की कमी और जीवन के उद्देश्य जैसे सवाल भी युवाओं के सामने लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे ही अनेक सवालों पर वैश्विक मानवतावादी एवं आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव रवि शंकर ने युवाओं से खुलकर संवाद किया।

आर्ट ऑफ लिविंग के यूथ डेस्क की ओर से आयोजित सातवें नेशनल इंडक्शन प्रोग्राम में देशभर के 1,300 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के हजारों प्रथम-वर्षीय विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें IIT, IIM, NIT और AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल रहे। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने रिश्तों से लेकर मानसिक शांति और सोशल मीडिया से लेकर करियर तक अपने मन में उठ रहे सवाल सीधे गुरुदेव के सामने रखे।

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‘सिचुएशनशिप’ या ‘सोलमेट’, गुरुदेव ने सवाल को ही बदल दिया

कार्यक्रम में एक विद्यार्थी ने आज की युवा पीढ़ी में तेजी से लोकप्रिय हो रहे ‘सिचुएशनशिप’ और ‘सोलमेट’ जैसे रिश्तों को लेकर सवाल पूछा। इस पर गुरुदेव ने सीधे कोई विकल्प बताने के बजाय युवाओं को दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने सवाल किया कि अगर आप किसी व्यक्ति को अपना जीवनसाथी मानें और सामने वाला आपको केवल एक ‘सिचुएशनशिप’ के रूप में देखना चाहे, तो आपको कैसा महसूस होगा? इस सवाल के जरिए उन्होंने युवाओं को रिश्तों में स्पष्टता, सम्मान और पारस्परिक भावनाओं को महत्व देने का संदेश दिया।

रात 2 बजे तक चलने वाली ओवरथिंकिंग पर श्वास का सहारा

कश्मीर से आई एक छात्रा ने जीवन में सब कुछ ठीक होने के बावजूद भीतर महसूस होने वाली निरर्थकता और खालीपन को लेकर अपनी चिंता साझा की। गुरुदेव ने इसे केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि आज के अनेक युवाओं के भीतर चल रहे व्यापक संघर्ष से जोड़कर देखा।

उन्होंने अकेलेपन और मानसिक उलझन से बाहर निकलने तथा जीवन में दोबारा अर्थ और उद्देश्य खोजने के लिए श्वास पर ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, भीतर की स्थिति को संतुलित करने में श्वास एक सरल और प्रभावी माध्यम बन सकती है।

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“शरारती बने रहिए”, लेकिन किसी को दर्द न दें

संवाद के दौरान गुरुदेव का सहज और हास्यपूर्ण अंदाज भी विद्यार्थियों को खूब पसंद आया। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें अपनी युवावस्था की ऊर्जा, जिज्ञासा और शरारत को कभी नहीं खोना चाहिए।

उन्होंने कहा, “शरारती बने रहिए। यही युवावस्था की पहचान है।” हालांकि उन्होंने इसके साथ यह भी स्पष्ट किया कि शरारत ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को पीड़ा पहुंचे।

भारतीय युवाओं की प्रतिभा को बताया दुनिया की संपदा

गुरुदेव ने विद्यार्थियों को दुनिया की वास्तविक संपदा बताते हुए उनकी क्षमताओं और संभावनाओं पर भरोसा रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभाओं की बात हो तो वहां भारतीय युवाओं की मौजूदगी दिखाई देती है।

इंजीनियरिंग, मेडिकल, कंप्यूटर साइंस, फैशन और हॉस्पिटैलिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केवल सफलता ही पर्याप्त नहीं है। युवाओं के व्यक्तित्व में एक महत्वपूर्ण गुण होना चाहिए—बाहर से दृढ़ और भीतर से लचीला होना।

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असफलता से डरने के बजाय खुद पर भरोसा रखें

गुरुदेव ने विद्यार्थियों को असफलताओं और अनिश्चितताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में शुरुआत की असफलता किसी व्यक्ति की अंतिम पहचान नहीं होती। कई ऐसे लोग भी रहे हैं जिन्होंने शुरुआती असफलताओं के बाद आगे चलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं।

उन्होंने युवाओं को स्वयं पर विश्वास बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि संदेह होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे अपनी पहचान नहीं बनने देना चाहिए।

30 सेकंड रह गई ध्यान की अवधि!

डिजिटल युग में युवाओं की घटती एकाग्रता पर भी गुरुदेव ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि आज छोटे-छोटे वीडियो और लगातार मिलने वाली डिजिटल उत्तेजना के कारण ध्यान की अवधि प्रभावित हो रही है।

उनके अनुसार, पहले लोग 40-50 मिनट तक एकाग्र रह सकते थे, जबकि आज ध्यान की अवधि कई बार केवल 30 सेकंड तक सीमित होती दिखाई देती है। इसका समाधान उन्होंने भीतर के तनाव को कम करने में बताया।

गुरुदेव के मुताबिक, जब व्यक्ति अंदर से तनावमुक्त होता है तो उसके भीतर ऊर्जा बढ़ती है और एकाग्रता भी स्वाभाविक रूप से बेहतर होने लगती है।

गुस्सा आए तो खुद को दंड न दें

भावनात्मक संतुलन पर बात करते हुए गुरुदेव ने क्रोध को लेकर भी युवाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुस्सा ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने से पहले स्वयं को ही दंड देने लगता है।

उन्होंने सलाह दी कि क्रोध आने पर कुछ गहरी सांसें लें, परिस्थिति से थोड़ा पीछे हटें और खुद को देखने का प्रयास करें। यदि संभव हो तो कठिन परिस्थिति को हास्य के माध्यम से हल्का करने की कोशिश करें।

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AI के दौर में हर जानकारी को सच न मानें

सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच गुरुदेव ने युवाओं को डिजिटल सामग्री को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज को सच नहीं मानना चाहिए। आज बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री मौजूद है जो गलत या भ्रामक हो सकती है और AI के जरिए तैयार की गई सामग्री ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है।

उन्होंने युवाओं से विवेकपूर्ण तरीके से डिजिटल कंटेंट को परखने का आग्रह किया।

FOMO से निकलकर ZOMO में जीने का संदेश

युवाओं के बीच लोकप्रिय शब्द FOMO यानी Fear of Missing Out यानी दूसरों से पीछे छूट जाने का डर भी संवाद का हिस्सा बना। इस पर गुरुदेव ने दोस्ती को एक बेहद सहज अंदाज में परिभाषित किया।

उन्होंने कहा कि अच्छा मित्र वह है जिसके साथ बातचीत करने के बाद व्यक्ति FOMO से बाहर निकल जाए। उन्होंने युवाओं को ZOMO में जीने की बात कही—अर्थात दूसरों की जिंदगी की तुलना करने के बजाय अपनी जिंदगी के वर्तमान क्षण का आनंद लेना।

उनकी इस बात पर सभागार में तालियों और हंसी की गूंज सुनाई दी।

युवाओं के लिए गुरुदेव का संदेश

पूरे संवाद का सार यही रहा कि युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं, सवालों और सपनों को दबाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें प्रयोग करना चाहिए, गलतियों से सीखना चाहिए और असफलता के बाद दोबारा खड़े होने का साहस बनाए रखना चाहिए।

गुरुदेव ने युवाओं को याद दिलाया कि सफलता की दौड़ में स्वयं को खोना नहीं है। प्रश्न पूछते रहें, सपने देखते रहें, जीवन में हास्य बनाए रखें और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें।

उन्होंने युवाओं के लिए शांति, ऊर्जा, करुणा और आत्मविश्वास को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए यह संदेश दिया कि आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार के बीच भी व्यक्ति को अपने भीतर की स्थिरता को बनाए रखना चाहिए।

यही इस संवाद का सबसे बड़ा संदेश रहा—दुनिया से जुड़िए, लेकिन खुद से भी जुड़े रहिए; आगे बढ़िए, लेकिन अपनी आंतरिक शांति को पीछे मत छोड़िए।

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