UPI MDR Framework: डिजिटल भुगतान की नई व्यवस्था, 2000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर नियम और फंड का भविष्य
देश में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (PSS) एक्ट-2007 में आवश्यक संशोधन करते हुए यूपीआई पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क की पूरी रूपरेखा आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। सोमवार, 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के बाद 15 सितंबर को NPCI द्वारा विस्तृत सर्कुलर जारी किया गया। यह नई शुल्क व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू की जाएगी।
आम नागरिक और छोटे कारोबारियों को पूर्ण राहत
इस नए फ्रेमवर्क में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। नई नीति के तहत 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई लेन-देन पर MDR को ‘शून्य’ रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी, किराना सामान, फल-सब्जी या चाय-नाश्ते के पेमेंट पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा।
वहीं, 2,000 रुपये से अधिक राशि के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत की दर से MDR लागू करने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क सभी पर एक समान रूप से नहीं थोपा जाएगा, बल्कि लेन-देन को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है। कुछ खास लेन-देन के लिए ‘फ्लैट-रेट मॉडल’ तैयार किया गया है, जिसके तहत 5 रुपये से लेकर अधिकतम 300 रुपये तक की एक निश्चित सीमा तय की गई है।

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MDR रेवेन्यू और समर्पित फंड का रोडमैप
इस नई नीति का सबसे अहम पहलू यह है कि मर्चेंट से वसूले गए इस शुल्क का उपयोग कहां और कैसे किया जाएगा। सर्कुलर के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर मिलने वाले कुल MDR का 5 फीसदी हिस्सा एक विशेष ‘समर्पित डेवलपमेंट फंड’ में ट्रांसफर किया जाएगा।
अब तक यूपीआई का संचालन काफी हद तक सरकारी बजटीय मदद और सब्सिडी पर निर्भर था। इस 5 प्रतिशत फंड के गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य यूपीआई इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और वित्तीय रूप से सक्षम बनाना है। इस फंड की प्राथमिक रूपरेखा निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी:
- ग्रामीण व टियर-3 शहरों का विस्तार: फंड की राशि का मुख्य उपयोग देश के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों, कस्बों और टियर-3 शहरों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को खड़ा करने और मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
- मर्चेंट ऑनबोर्डिंग व जागरूकता: छोटे और सीमांत व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
- साइबर सुरक्षा व सर्वर अपग्रेडेशन: यूपीआई नेटवर्क की सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप अभेद्य बनाने, बैंकों और फिनटेक कंपनियों की सर्वर क्षमता बढ़ाने तथा साइबर धोखाधड़ी रोकने वाले तकनीकी सुरक्षा चक्र को वित्तीय ताकत दी जाएगी।

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फिनटेक जगत का सकारात्मक रुख
इस नए नीतिगत सुधार का उद्योग जगत ने भी स्वागत किया है। प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म PhonePe के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) समीर निगम ने इस कदम को उद्योग के लिए गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR इंडस्ट्री के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल खड़ा करेगा।
निगम के अनुसार, इस रेवेन्यू को कंपनियां वापस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, अनुसंधान और नवाचार में पुनर्निवेश कर सकेंगी। इससे फिनटेक कंपनियों और बैंकों की वित्तीय सेहत सुधरेगी और वे उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तकनीकी रुकावट या सर्वर डाउनटाइम के उच्च स्तरीय सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे।
रिकॉर्ड तोड़ता यूपीआई का दायरा
देश में नकदी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव तेजी से हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए होने वाले मासिक लेन-देन की संख्या 24.51 अरब के रिकॉर्ड आंकड़े तक पहुंच गई, जिसका कुल वित्तीय मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा।
इतने विशाल लेन-देन भार को बिना किसी तकनीकी विफलता के संभालना किसी भी बैंकिंग ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती है। 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा यह नया MDR ढांचा न केवल इस विशाल ट्रैफिक को संभालने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाएगा, बल्कि देश के डिजिटल भुगतान नेटवर्क को दीर्घकाल तक सुरक्षित, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाए रखने में आधारशिला साबित होगा।

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