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एमबीएम विश्वविद्यालय में 1974 बैच के स्टूडेंट वेलफेयर सेंटर का लोकार्पण, शेखावत ने कहा- एल्युमिनाई योगदान भारतीय संस्कृति का नैसर्गिक दायित्व

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एमबीएम विश्वविद्यालय में 1974 बैच के ‘गोल्डन जुबली स्टूडेंट वेलफेयर सेंटर’ का लोकार्पण, केंद्रीय मंत्री ने साझा किए छात्रसंघ अध्यक्ष कार्यकाल के संस्मरण

जोधपुर, 16 अगस्त। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जीवन में धन अर्जित करना, नाम कमाना और बड़े पदों तक पहुंचना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपने पीछे क्या छोड़कर जाता है। एमबीएम विश्वविद्यालय के 1974 बैच ने केवल एक भवन का निर्माण नहीं किया, बल्कि एल्युमिनाई की एक नई परंपरा की नींव रखी है।

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रविवार को शेखावत ने एमबीएम विश्वविद्यालय में 1974 बैच द्वारा निर्मित ‘गोल्डन जुबली स्टूडेंट्स वेलफेयर सेंटर’ का औपचारिक लोकार्पण एवं उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी पुरानी यादों, छात्र राजनीति के अनुभवों और एल्युमिनाई की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।

कैंपस के हर पत्थर से जुड़ी है याद

शेखावत ने कहा कि एमबीएम विश्वविद्यालय से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। कैंपस का हर पत्थर और हर दीवार उनके जीवन की किसी न किसी स्मृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि 1974 बैच का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।

छात्रसंघ अध्यक्ष रहते गर्ल्स हॉस्टल का संघर्ष

केंद्रीय मंत्री ने अपने 1992 के छात्रसंघ अध्यक्ष कार्यकाल का संस्मरण साझा करते हुए गर्ल्स हॉस्टल निर्माण से जुड़ा किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि 1993 के बैच में एक साथ 28 छात्राओं ने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था। इससे पहले इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्राओं की संख्या केवल 5 से 7 के आसपास रहती थी।

उन्होंने बताया कि छात्राएं कमला नेहरू गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में रहती थीं, लेकिन जगह की कमी के कारण तत्कालीन डायरेक्टर प्रो. कामिनी दिनेश ने इंजीनियरिंग की छात्राओं को वहां रखने में असमर्थता जताई। इसके बाद छात्राओं ने छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में उनसे संपर्क किया।

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शेखावत ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन कुलपति वी.आर. मेहता के सामने छात्राओं की समस्या रखी और विरोध दर्ज कराया। निजी मकान को हॉस्टल बनाने के सुझाव पर छात्रसंघ ने छात्राओं की सुरक्षा और सिक्योरिटी का मुद्दा उठाया। काफी चर्चा और प्रयासों के बाद विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस और कलेक्टर आवास के सामने स्थित फॉरेन स्टूडेंट्स हॉस्टल के बीच के भवन को छात्राओं के हॉस्टल के लिए चिन्हित किया गया।

बांगड़ छात्रावास का भी किया उल्लेख

शेखावत ने बांगड़ छात्रावास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंगनीराम बांगड़ के सहयोग से बने छात्रावास के लिए उन्हें हरिमोहन बांगड़ से केवल एक बार अनुरोध करना पड़ा था। इसके बाद करीब 4-5 करोड़ रुपये की सहायता से छात्रावास का निर्माण कराया गया। उन्होंने कहा कि गर्ल्स हॉस्टल की व्यवस्था के लिए किया गया संघर्ष उनके लिए अलग तरह का रोमांचकारी अनुभव रहा।

50 साल की मित्रता का ‘स्मृति मंदिर’

केंद्रीय मंत्री ने 1974 बैच के संयोजक किशन सिंह गहलोत और सोहन बुद्रा सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘स्टूडेंट वेलफेयर सेंटर’ केवल ईंट, पत्थर, सीमेंट और स्टील का ढांचा नहीं है, बल्कि 50 साल की मित्रता का स्मृति मंदिर है।

उन्होंने कहा कि एल्युमिनाई किसी भी संस्थान की ‘ऑर्गनाइजेशनल मेमोरी’ और ‘प्रोफेशनल एक्सटेंडेड नेटवर्क’ होता है। पूर्व छात्रों का नेटवर्क संस्थान की पहचान और उसकी ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है।

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समाज को वापस देना भारतीय संस्कृति का हिस्सा

शेखावत ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का उदाहरण देते हुए कहा कि आज सीएसआर एक कानूनी और आधिकारिक शब्द बन गया है, लेकिन भारत की सभ्यता और संस्कृति में यह भावना हमेशा से मौजूद रही है।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति ने समाज, परिवार या शिक्षण संस्थान से जो कुछ प्राप्त किया है, उसे वापस लौटाना उसका नैसर्गिक दायित्व है। 1974 बैच ने स्टूडेंट वेलफेयर सेंटर का निर्माण कर आने वाली पीढ़ियों के सामने इसी भावना का आदर्श प्रस्तुत किया है।

पूर्व छात्र नेटवर्क की ताकत का सुनाया उदाहरण

शेखावत ने अपने बेटे के ऊटी स्थित लॉरेंस स्कूल से जुड़े अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां के पूर्व छात्रों का नेटवर्क बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों की आपसी कनेक्टिविटी किसी भी व्यक्ति को देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि यही एल्युमिनाई नेटवर्क की असली ताकत है और एमबीएम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को भी इसी भावना के साथ संस्थान और आने वाली पीढ़ियों के लिए योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय से जुड़े पूर्व छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य लोगों ने 1974 बैच के इस प्रयास की सराहना की। स्टूडेंट वेलफेयर सेंटर को एमबीएम विश्वविद्यालय और उसके एल्युमिनाई के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक बताया गया।

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