Advertisement

जोधपुर नगर निगम चुनाव: 19 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, 23 में त्रिकोणीय मुकाबला

blank

वार्ड-47 में सबसे ज्यादा 13 प्रत्याशी मैदान में, 9 निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़ाई प्रमुख दलों की चुनौती

जोधपुर । जोधपुर नगर निगम चुनाव में नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वार्डवार चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। शहर के 19 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि 23 वार्डों में निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों की मौजूदगी से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कई वार्डों में बागियों के मैदान से हटने के बाद भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर का रास्ता भी साफ हुआ है।

blank

दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर

नामांकन के अंतिम दिन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने बागी प्रत्याशियों को मनाने में सफलता हासिल की। इसके बाद कई हॉट सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है।

  • वार्ड नंबर 40: भाजपा के पूर्व डिप्टी मेयर देवेंद्र सालेचा के सामने कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद नरेशचंद्र जोशी मैदान में हैं।
  • वार्ड नंबर 25: भाजपा की ओर से पूर्व न्यासी कमलेश पुरोहित चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने 27 वर्षीय आनंद राठी को प्रत्याशी बनाया है।
  • वार्ड नंबर 42: भाजपा के मेघराज लोहिया और कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार वर्मा के बीच मुख्य मुकाबला है। हालांकि यहां दो निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं।

वार्ड-47 बना सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा

वार्ड नंबर 47 में चुनावी मुकाबला सबसे ज्यादा रोचक हो गया है। यहां कुल 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें 9 निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी (आप) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं।

blank

इन वार्डों में भी बहुकोणीय मुकाबला

वार्ड नंबर 3 में 8 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं वार्ड नंबर 48 और वार्ड नंबर 73 में 7-7 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में इन वार्डों में भी जीत का समीकरण भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ निर्दलीय व अन्य दलों के प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रत्याशी प्रचार अभियान में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में वार्डवार राजनीतिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे और बागी प्रत्याशियों का प्रभाव चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *