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जोधपुर की शहरी सरकार पर भाजपा का कब्जा, प्रसन्नचंद मेहता बने महापौर

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कांग्रेस के राजेंद्र सोलंकी को 6 मतों से हराया, मेहता को 53 और कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 47 वोट; मतदान के बाद भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हंगामा

जोधपुर। जोधपुर नगर निगम की शहरी सरकार पर अब भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया है। शुक्रवार को हुए महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को 6 मतों के अंतर से हराकर महापौर पद पर जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम के अनुसार प्रसन्नचंद मेहता को 53 वोट, जबकि राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले।

51 वोट था बहुमत का आंकड़ा

महापौर चुनाव में कुल 101 पार्षदों के बीच बहुमत के लिए 51 वोट की आवश्यकता थी। नगर निगम में भाजपा के 45 और कांग्रेस के 44 पार्षद बताए गए थे। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक आरएलपी समर्थित पार्षद भी चुनाव में निर्णायक भूमिका में थे।

चुनाव से पहले 7 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन देते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद भाजपा के समर्थन में 52 पार्षदों का आंकड़ा बन गया था। मतदान के दौरान भाजपा के पक्ष में एक अतिरिक्त वोट आने के बाद मेहता को कुल 53 वोट मिले।

वहीं कांग्रेस की ओर से चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया गया था, लेकिन मतदान के परिणाम में कांग्रेस प्रत्याशी को 47 वोट ही मिल सके।

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मतदान के बाद एमआईसी के बाहर हंगामा

महापौर चुनाव की मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निगम परिसर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई। एमआईसी के बाहर दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। कहासुनी के बाद माहौल गरमा गया और झड़प की स्थिति पैदा हो गई।

हंगामे के दौरान एक वाहन का कांच टूटने की भी जानकारी सामने आई। घटना के बाद कुछ समय के लिए निगम परिसर के बाहर अफरा-तफरी का माहौल रहा।

कांग्रेस ने लगाया बस रोकने और पत्थरबाजी का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्षदों को लेकर जा रही बस को रोकने का प्रयास किया और पत्थरबाजी की। कांग्रेस नेता करण सिंह उचियारड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता बस के आगे बैठकर नारेबाजी कर रहे थे और पत्थरबाजी की गई। कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला बताया।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखा जा रहा है।

कांग्रेस पार्षद प्रदीप गांग ने जताई नाराजगी

मतदान के बाद कांग्रेस पार्षद प्रदीप गांग सबसे पहले बाहर आए। उन्होंने मतदान के बाद पार्षदों को बाहर भेजे जाने को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि वोट डालने के तुरंत बाद उन्हें बाहर भेज दिया गया, जबकि पार्षदों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।

1977 में एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

नवनिर्वाचित महापौर प्रसन्नचंद मेहता का राजनीतिक सफर लंबे समय से संगठन से जुड़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने 1977 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपनी राजनीतिक-संगठनात्मक यात्रा शुरू की थी।

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इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े और कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक के रूप में संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा की शुरुआत के दौर में भी वे इससे जुड़े और जोधपुर भाजयुमो के पहले जिलाध्यक्ष बने।

भाजपा जिलाध्यक्ष से प्रदेश उपाध्यक्ष तक जिम्मेदारी

प्रसन्नचंद मेहता 1990 के दशक में भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे। संगठन में लंबे अनुभव के चलते उन्हें पार्टी के विभिन्न पदों और चुनावी जिम्मेदारियों में भूमिका मिली।

वे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। सतीश पूनिया के प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान मेहता प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। इसके अलावा विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में उन्हें अलग-अलग शहरों की चुनावी जिम्मेदारियां भी दी गईं।

अब जोधपुर नगर निगम की कमान मेहता के हाथों में

महापौर चुनाव में जीत के साथ प्रसन्नचंद मेहता अब जोधपुर नगर निगम के महापौर पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। लंबे संगठनात्मक अनुभव और नगर निगम में भाजपा के बहुमत के बीच अब शहर की शहरी सरकार के संचालन की जिम्मेदारी उनके सामने होगी। वहीं कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम के बाद अपने पार्षदों के बीच समर्थन के समीकरण और चुनावी रणनीति की समीक्षा का मुद्दा सामने रहेगा।

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