भारतीय सेना ने संचार, समन्वय और मारक क्षमता से लेकर युद्ध संचालन तक परखी दक्षता
जैसलमेर। भारतीय सेना की युद्ध तैयारियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से जैसलमेर में ‘थार रैप्टर्स’ के अटैक हेलीकॉप्टरों और ‘ब्लैक मेस ब्रिगेड’ के टैंकों ने संयुक्त एकीकृत युद्धाभ्यास किया। कोणार्क कोर के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में हवाई और जमीनी युद्ध क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।
हवाई और जमीनी ताकत का दिखा तालमेल
अभ्यास के दौरान अटैक हेलीकॉप्टरों और टैंकों ने एक साथ विभिन्न ऑपरेशनल गतिविधियों को अंजाम दिया। आधुनिक युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हवाई प्लेटफॉर्म और जमीनी बख्तरबंद संसाधनों के बीच त्वरित सूचना आदान-प्रदान, प्रभावी संचार, सैन्य मूवमेंट और मारक क्षमता का परीक्षण किया गया।

इस संयुक्त प्रशिक्षण का उद्देश्य युद्ध के दौरान लक्ष्य की पहचान, त्वरित प्रतिक्रिया और निर्णायक कार्रवाई के लिए दोनों सैन्य संसाधनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। अभ्यास से भारतीय सेना की एकीकृत युद्ध क्षमता और ऑपरेशनल तैयारियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
‘वन टीम, वन पर्पज’ की भावना
भारतीय सेना ने इस अभ्यास को “वन टीम, वन पर्पज, एब्सोल्यूट बैटलफील्ड डोमिनेंस” की भावना से जोड़ा। अभ्यास ने यह संदेश दिया कि अलग-अलग सैन्य इकाइयां जब एकीकृत कमान, प्रभावी संचार और सटीक समन्वय के साथ काम करती हैं, तो उनकी सामूहिक युद्ध क्षमता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
जैसलमेर के रेगिस्तानी क्षेत्र में हुआ यह संयुक्त अभ्यास भारतीय सेना की हवाई-जमीनी एकीकृत युद्ध क्षमता और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप तैयारियों को परखने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशिक्षण माना जा रहा है।

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