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15 घंटे में दिल्ली से सिलीगुड़ी: 8 राज्यों को जोड़ेगा नया ‘महाएक्सप्रेसवे’, अंबाला-गोरखपुर से भी सीधी कनेक्टिविटी

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15 घंटे में दिल्ली से सिलीगुड़ी: NHAI के ‘महाएक्सप्रेसवे’ से जुड़ेंगे 8 राज्य, जानिए इस कॉरिडोर की खासियतें

नई दिल्ली: देश में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का चेहरा तेज़ी से बदल रहा है। सड़क और परिवहन नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उत्तर प्रदेश वर्तमान में देश में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में उभरा है, लेकिन अब NHAI की योजना इससे भी कहीं अधिक महत्वाकांक्षी है। प्राधिकरण तीन विशाल एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को आपस में जोड़कर एक ऐतिहासिक ‘अंबाला-शामली-गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर’ विकसित कर रहा है।
यह केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर भारत से पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार को जोड़ने वाली देश की नई आर्थिक जीवनरेखा साबित होगी।

किन 8 राज्यों और क्षेत्रों को जोड़ेगा यह नेटवर्क?

इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी इसका अंतर-राज्यीय विस्तार है। यह विशाल कॉरिडोर उत्तर और पूर्व भारत के कई प्रमुख राज्यों को एक सूत्र में पिरोएगा:
  1. पंजाब
  2. हरियाणा
  3. दिल्ली-एनसीआर
  4. उत्तराखंड
  5. उत्तर प्रदेश
  6. बिहार
  7. पश्चिम बंगाल
  8. पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए सीधा प्रवेश द्वार।
अंबाला से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे नेटवर्क शामली, गोरखपुर और बिहार के प्रमुख हिस्सों से गुजरते हुए सीधे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। इसके बन जाने से उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच की दूरी अप्रत्याशित रूप से घट जाएगी।

32 घंटे का थकाऊ सफर अब सिर्फ 15-16 घंटे में

वर्तमान में यदि कोई दिल्ली या अंबाला से सड़क मार्ग के जरिए सिलीगुड़ी जाता है, तो उसे घनी आबादी, जाम, जंक्शनों और संकरे रास्तों के कारण लगभग 28 से 32 घंटे तक का भारी समय लग जाता है। भारी वाहनों और ट्रकों के लिए यह समय और भी बढ़ जाता है।
इस नए ग्रीनफील्ड और हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार होने के बाद, यात्रा का यह समय घटकर लगभग 15 से 16 घंटे रह जाएगा। यानी यात्रियों और माल ढुलाई दोनों का समय लगभग आधा हो जाएगा, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी और यात्रा बेहद सुगम हो जाएगी।
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परियोजना के तीन प्रमुख हिस्से (The 3 Core Links)

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यह महा-कॉरिडोर मुख्य रूप से तीन बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के संगम से आकार ले रहा है:
  1. अंबाला-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर: पंजाब और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने का काम करेगा।
  2. शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे: यह उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वांचल से जोड़ेगा। इसके बनने से दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक बिना लखनऊ या कानपुर के भीड़भाड़ वाले रास्तों में फंसे सीधे पूर्वांचल की ओर निकल सकेगा।
  3. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल को सीधे बिहार के उत्तरी जिलों (जैसे मोतिहारी, दरभंगा, किशनगंज) से होते हुए सिलीगुड़ी (चिकन नेक कॉरिडोर के पास) से जोड़ेगा।
इन तीनों खंडों के आपस में जुड़ जाने से यह देश का सबसे लंबा और निरंतर चलने वाला हाई-स्पीड रूट बन जाएगा।

आर्थिक क्रांति और व्यापार को नई गति

सिलीगुड़ी को पूरे पूर्वोत्तर (North-East) भारत का प्रवेश द्वार (Gateway) कहा जाता है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश या अन्य राज्यों तक जाने वाले सभी व्यावसायिक वाहन यहीं से होकर गुजरते हैं।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 8-9% तक लाने के लक्ष्य में यह कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा। ट्रकों की औसत गति बढ़ने से माल की डिलीवरी समय पर होगी।
  • कृषि और बागवानी को लाभ: बिहार का मखाना, लीची, पूर्वोत्तर की चाय और पश्चिम बंगाल के कृषि उत्पाद अब कुछ ही घंटों में दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के बड़े बाजारों तक ताज़ा पहुंच सकेंगे।
  • पर्यटन को बढ़ावा: दिल्ली और आसपास के सैलानियों के लिए दार्जिलिंग, सिक्किम, गंगटोक और पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचना बेहद आसान और रोमांचक हो जाएगा।

आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल निर्माण

यह कॉरिडोर पूरी तरह से ‘एक्सेस-कंट्रोल्ड’ (Access-Controlled) होगा, जिसका अर्थ है कि इसमें केवल निर्धारित इंटरचेंज से ही प्रवेश और निकास मिलेगा। इससे दुर्घटनाओं की आशंका नगण्य हो जाएगी। इसके अलावा, पूरे मार्ग पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), डिजिटल टोलिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन्स और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

निष्कर्ष

‘अंबाला-शामली-गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में एक युगांतरकारी कदम है। यह न सिर्फ दिल्ली और सिलीगुड़ी के बीच की भौगोलिक दूरी को कम करेगा, बल्कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को और अधिक मजबूत करेगा। जब यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतरेगा, तो यह ‘नए भारत’ की गति और प्रगति का सबसे जीवंत उदाहरण बनेगा।

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