दो साल में 100 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य, स्थानीय किसानों से जिम्मेदार सोर्सिंग और तमिलनाडु फैक्ट्री में होगा उत्पादन
जयपुर। हेल्थ और वेलनेस कंपनी एम्वे इंडिया ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा को समर्थन देने की दिशा में आयुर्वेद क्षेत्र में अपने विस्तार की घोषणा की है। कंपनी ने न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के तहत नौ नए आयुर्वेदिक उत्पाद पेश किए हैं और अगले दो वर्षों में इस श्रेणी से 100 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
कंपनी के मुताबिक, इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां न्यूट्रीसर्ट प्रमाणित ऑर्गेनिक खेतों से जिम्मेदारी के साथ प्राप्त की जाती हैं। इसके बाद उत्पादों का निर्माण तमिलनाडु स्थित एम्वे की अत्याधुनिक फैक्ट्री में किया जाता है। कंपनी का दावा है कि यह पहल जिम्मेदार सोर्सिंग, स्थानीय किसानों के सहयोग, वैज्ञानिक शोध और भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देते हुए ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करती है।
5,000 साल पुराने आयुर्वेद और 90 साल के बॉटनिकल साइंस का मेल
एम्वे के अनुसार, न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद की पहल में भारत के करीब 5,000 साल पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान को न्यूट्रिलाइट के 90 साल से अधिक के बॉटनिकल साइंस अनुभव के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन को आधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और गुणवत्ता मानकों के आधार पर विकसित करना है।
एम्वे इंडिया के प्रबंध निदेशक रजनीश चोपड़ा ने कहा कि आयुर्वेद और पारंपरिक वेलनेस को लेकर भारत में तेजी से बदलता माहौल नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में भारत की विनिर्माण और इनोवेशन क्षमता बढ़ने से देश पारंपरिक वेलनेस के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इसी क्षमता को देखते हुए कंपनी ने न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद को अगले दो वर्षों में 100 करोड़ रुपये का कारोबार बनाने का लक्ष्य रखा है।
पहले चरण में तीन प्रमुख फॉर्मूलेशन
न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के शुरुआती चरण में तीन फॉर्मूलेशन बाजार में उतारे जा रहे हैं—
- कालमेघ: कंपनी के अनुसार, लिवर के बेहतर कामकाज में सहायता के लिए।
- शिग्रु (मोरिंगा): शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने और सूजन को कम करने में मदद के लिए।
- वृक्षाम्ल (गार्सिनिया): मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने और पेट भरे रहने का अहसास बनाए रखने में मदद के लिए।
कंपनी ने कहा कि उत्पादों को उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहां लोग बीमारी के इलाज से अधिक रोकथाम और रोजमर्रा की वेलनेस पर ध्यान दे रहे हैं।
जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता और ट्रेसेबिलिटी पर जोर
एम्वे ने बताया कि न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के तहत इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की प्रामाणिकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर जांच की जाती है। इसमें डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, एक्टिव इंग्रेडिएंट टेस्टिंग और सीड-टू-सप्लीमेंट ट्रेसेबिलिटी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसके अलावा उत्पादों में दूषित तत्वों, भारी धातुओं, माइक्रोबायोलॉजिकल सुरक्षा और प्रमुख मार्कर कंपाउंड्स की एकरूपता की भी जांच की जाती है। कंपनी के अनुसार, इससे उत्पादों की गुणवत्ता, प्रामाणिकता और एकरूपता बनाए रखने में मदद मिलती है।
8 सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे उत्पाद
एम्वे के अनुसार, न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के उत्पाद 8 सितंबर 2026 से कंपनी के अधिकृत चैनलों, एम्वे बिजनेस ओनर्स/डिस्ट्रीब्यूटर्स, एम्वे स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।
एमआरपी:
- कालमेघ — 449 रुपये
- शिग्रु — 651 रुपये
- वृक्षाम्ल — 449 रुपये
कंपनी ने बताया कि यह लॉन्च पहले पेश किए गए न्यूट्रिलाइट च्यवनप्राश के अनुभव को आगे बढ़ाता है। न्यूट्रिलाइट आयुर्वेद के जरिए एम्वे का लक्ष्य पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक शोध, गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक विनिर्माण के साथ जोड़कर भारत में आयुर्वेदिक वेलनेस उत्पादों के बाजार को विस्तार देना है।

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