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भोपालगढ़ अस्पताल में 5 दिन में दो प्रसूताओं की मौत: महिला चिकित्सक व नर्सिंग ऑफिसर एपीओ, जांच कमेटी गठित

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इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच चिकित्सा विभाग की बड़ी कार्रवाई, एक अन्य प्रसूता ने भी लगाए गंभीर आरोप।

जोधपुर। जिले के राजकीय उप जिला अस्पताल, भोपालगढ़ में महज पांच दिनों के भीतर दो प्रसूताओं की मौत के बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला चिकित्सक डॉ. रतन कंवर एवं नर्सिंग ऑफिसर प्रेम भाटी को एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार देर शाम नागौर जिले के मुंडवा क्षेत्र के ब्यावड़ी गांव निवासी किरण पत्नी राजेंद्र को प्रसव पीड़ा होने पर भोपालगढ़ के राजकीय उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार सुबह महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर उसे जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

इससे पहले नागौर जिले के हरसोला (गोटन) निवासी एक गर्भवती महिला को शनिवार को प्रसव पीड़ा के चलते भोपालगढ़ अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान उसकी भी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल प्रशासन ने उसे उम्मेद अस्पताल, जोधपुर रेफर किया, लेकिन रास्ते में अत्यधिक रक्तस्राव होने के बाद उम्मेद अस्पताल पहुंचने के कुछ समय बाद ही उसकी भी मौत हो गई।

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दोनों घटनाओं के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसूति सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों एवं परिजनों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

इसी बीच भोपालगढ़ क्षेत्र के बिराई गांव निवासी रामेश्वरी पत्नी मोंटू देवड़ा ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रामेश्वरी ने बताया कि 23 जुलाई को उन्हें प्रसव के लिए उप जिला अस्पताल भोपालगढ़ में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि प्रसव करवाने के नाम पर उनसे ₹5,000 की मांग की गई। आरोप यह भी है कि महिला चिकित्सक ने यह कहकर उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया कि उनका ब्लड प्रेशर कम है और उन्हें रेफर कर दिया गया।

रामेश्वरी का कहना है कि चिकित्सक अपने सरकारी क्वार्टर पर मरीज देखने चली गईं और अस्पताल में भर्ती प्रसूता को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर ने कहा था कि डिलीवरी में अभी सात दिन का समय है तथा दवाइयां देकर भेज दिया। इसके बाद परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहां मात्र आधे घंटे में सुरक्षित प्रसव हो गया।

इन घटनाओं के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (द्वितीय), जोधपुर डॉ. जितेंद्र सिंह चारण ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए। आदेश के तहत महिला चिकित्सक डॉ. रतन कंवर एवं नर्सिंग ऑफिसर प्रेम भाटी को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर उनका मुख्यालय संयुक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, जोधपुर जोन निर्धारित किया गया है।

विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जो दोनों प्रसूताओं की मौत के कारणों, उपचार प्रक्रिया, अस्पताल की व्यवस्थाओं तथा लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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फिलहाल इस मामले ने भोपालगढ़ अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, प्रसूति प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं।

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