Iran-US Ceasefire: दो हफ्ते के युद्धविराम से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को राहत
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Iran और United States के बीच आखिरकार दो हफ्तों के लिए सीजफायर (Iran-US Ceasefire) पर सहमति बन गई है। इस युद्धविराम पर Israel ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में तुरंत असर देखने को मिला है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीजफायर से न केवल मध्य पूर्व में तनाव अस्थायी रूप से कम होगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। खासतौर पर India जैसे देशों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है।
दो हफ्तों के लिए थमेगी जंग
मिली जानकारी के अनुसार, यह सीजफायर फिलहाल दो सप्ताह के लिए लागू रहेगा। इस दौरान दोनों पक्ष आगे की रणनीति और स्थायी समाधान पर बातचीत करेंगे। युद्धविराम के तहत जिन अहम मुद्दों पर सहमति बनी है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को खोलना और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना शामिल है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग माना जाता है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से कच्चे तेल की ढुलाई पर निर्भर है। जब भी इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है या इसे बंद किया जाता है, तो वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। ऐसे में इसके दोबारा खुलने से बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट
सीजफायर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने की खबर मिलते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। Brent Crude की कीमत करीब 13.07 फीसदी गिरकर 94.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं WTI Crude Oil की कीमत में 13.83 फीसदी की गिरावट आई और यह 97.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
तेल की कीमतों में इस गिरावट को हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीजफायर लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
भारत को क्यों मिलेगी सबसे ज्यादा राहत
भारत उन देशों में शामिल है, जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से सबसे ज्यादा फायदा होगा। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। जब इस मार्ग पर संकट पैदा होता है, तो भारत के लिए तेल आयात महंगा हो जाता है और इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे आयात लागत कम हो सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे रहती हैं, तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
आगे क्या रह सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर फिलहाल अस्थायी है, लेकिन यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकाल लेते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में दोबारा उछाल भी देखने को मिल सकता है।

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