भारतीय रेलवे का नया दौर: देश की पहली LNG ट्रेन को अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी, साबरमती से हुई ऐतिहासिक शुरुआत
भारतीय रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक तकनीक वाले परिवहन की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाइड्रोजन ट्रेन की दिशा में चल रहे परीक्षणों के बीच, रेलवे ने द्रवीभूत प्राकृतिक गैस यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को पटरी पर उतार दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसे भारतीय रेल परिचालन को किफायती, सुरक्षित और कम कार्बन उत्सर्जन वाला बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी उपलब्धि माना जा रहा है।

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क्या है देश की पहली LNG ट्रेन और इसका महत्व?
यह परियोजना भारतीय रेल के ‘हरित रेल’ (Green Railways) मिशन का एक मुख्य स्तंभ है। सामान्य डीजल लोकोमोटिव से चलने वाली ट्रेनों से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और ईंधन पर भारी खर्च आता है। इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे वैकल्पिक ईंधनों पर जोर दे रहा है।
साबरमती से शुरू की गई यह ट्रेन ड्यूल-फ्यूल (दोहरे ईंधन) तकनीक पर कार्य करती है। इसका अर्थ है कि यह ट्रेन आवश्यकतानुसार डीजल और गैस दोनों के माध्यम से संचालित होने में सक्षम है। इस प्रणाली के प्रयोग से भारी मात्रा में डीजल की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कटौती दर्ज की जाएगी।
साबरमती से शुरुआत: अमित शाह ने किया रवाना
अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया। इस अवसर पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
अमित शाह ने इस शुरुआत को देश की आत्मनिर्भर तकनीक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तालमेल का प्रतीक बताया। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार इस ट्रेन में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। गैस स्टोरेज और इंजन तक ईंधन की निरंतर आपूर्ति को पूरी तरह ऑटोमेटेड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे परिचालन के दौरान उच्चतम सुरक्षा बनी रहे।

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LNG ट्रेन के प्रमुख लाभ और विशेषताएं
- प्रदूषण में भारी कमी:डीजल की तुलना में प्राकृतिक गैस का दहन अधिक स्वच्छ होता है। इससे पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले तत्वों का उत्सर्जन लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
- किफायती रेल परिचालन (Cost Effective):रेलवे के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक ईंधन की खरीद में खर्च होता है। LNG के प्रयोग से ईंधन लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक की सीधी बचत होने का अनुमान है, जिससे रेलवे की वित्तीय दक्षता मजबूत होगी।
- ड्यूल-फ्यूल तकनीक की सुविधा:इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गैस और डीजल दोनों विकल्पों पर काम कर सकती है। किसी तकनीकी कारणवश या रास्ते में गैस खत्म होने पर यह तुरंत डीजल मोड पर स्विच हो जाती है, जिससे यात्रा में कोई रुकावट नहीं आती।
- इंजन की बेहतर कार्यक्षमता:प्राकृतिक गैस के उपयोग से इंजन के आंतरिक पुर्जों पर कार्बन का जमाव कम होता है, जिससे लोकोमोटिव की मेंटेनेंस लागत घटती है और इंजन की कार्य अवधि बढ़ती है।
2030 तक ‘नेट ज़ीरो’ का लक्ष्य
भारतीय रेलवे वर्ष 2030 तक पूरी तरह ‘नेट ज़ीरो कार्बन एमिटर’ बनने के लक्ष्य पर काम कर रही है। जहां एक ओर देश के ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग पूर्ण विद्युतीकरण किया जा रहा है, वहीं गैर-विद्युतीकृत या विशेष मार्गों पर हाइड्रोजन और LNG जैसे स्वच्छ ईंधनों का प्रयोग बढ़ाया जा रहा है। साबरमती से शुरू हुआ यह मॉडल सफल परीक्षणों के बाद देश के अन्य रेल मंडलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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