15 से 29 अक्टूबर तक अर्धवार्षिक परीक्षाएं, 23 अक्टूबर से पंचायत चुनाव का पहला चरण; चुनाव ड्यूटी और परीक्षा संचालन को लेकर चिंता
दीपावली अवकाश के दौरान भी चुनावी चरण, छुट्टियों पर पड़ सकता है असर
भोपालगढ़। प्रदेश में पंचायत चुनाव और सरकारी स्कूलों की अर्धवार्षिक परीक्षाओं की प्रस्तावित तारीखें एक-दूसरे के आसपास होने से शिक्षा विभाग और शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। शिविरा पंचांग के अनुसार कक्षा 9वीं से 12वीं तक की अर्धवार्षिक परीक्षाएं 15 से 29 अक्टूबर तक प्रस्तावित हैं, जबकि पंचायत चुनाव का पहला चरण 23 अक्टूबर से शुरू होना है और चुनाव का चौथा चरण 16 नवंबर को संपन्न होगा। ऐसे में परीक्षा अवधि के बीच चुनाव ड्यूटी आने से शिक्षकों के सामने दोहरी जिम्मेदारी की स्थिति बन सकती है।
राज्य स्तरीय परीक्षा होने से बढ़ी चिंता
कक्षा 9वीं से 12वीं तक की अर्धवार्षिक परीक्षाएं सरकारी विद्यालयों में राज्य स्तर पर निर्धारित समान टाइम टेबल के अनुसार आयोजित की जाती हैं। ऐसे में यदि किसी जिले में परीक्षा की तारीख के दौरान पंचायत चुनाव की प्रक्रिया या मतदान ड्यूटी आती है तो परीक्षा संचालन प्रभावित होने की आशंका है।
शिक्षकों को पंचायत चुनाव के दौरान प्रशिक्षण से लेकर मतदान केंद्रों पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में एक ही समय में चुनावी ड्यूटी और विद्यालय में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी आने पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शिक्षकों का कहना है कि चुनाव प्रशिक्षण और मतदान ड्यूटी के कारण कई शिक्षक विद्यालय से बाहर रहेंगे। इसका सीधा असर परीक्षा की तैयारियों, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। वहीं, परीक्षा के दौरान शिक्षकों की उपलब्धता कम होने से स्कूल प्रशासन के सामने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करने की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।
आठवीं तक की परीक्षाएं भी हो सकती हैं प्रभावित
कक्षा 8वीं तक की परीक्षाएं स्कूल स्तर पर आयोजित की जाती हैं, लेकिन इन कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षक भी पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण और ड्यूटी में लगाए जा सकते हैं। ऐसे में भले ही इन कक्षाओं की परीक्षा राज्य स्तर पर एक समान टाइम टेबल से नहीं हो, लेकिन चुनावी ड्यूटी के कारण स्कूल स्तर पर परीक्षा संचालन प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।
शिक्षकों का कहना है कि चुनावी ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में शिक्षा विभाग को परीक्षा और चुनाव दोनों व्यवस्थाओं के बीच समन्वय बनाकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है।
शिक्षा विभाग के आदेश का इंतजार
मामले को लेकर स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने फिलहाल किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा और पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर शिक्षा निदेशालय स्तर से जो भी आदेश या दिशा-निर्देश जारी होंगे, उसी के अनुसार आगे की व्यवस्था की जाएगी।
शिक्षकों को अब विभाग के स्पष्ट आदेश का इंतजार है, ताकि यह तय हो सके कि परीक्षा संचालन और चुनाव ड्यूटी के बीच किस प्रकार समन्वय किया जाएगा।
दीपावली अवकाश पर भी पड़ सकता है असर
पंचायत चुनाव की तारीखों का असर स्कूलों के प्रस्तावित दीपावली अवकाश पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षक नेताओं रामलाल जाखड़ और जयकिशन सारण ने बताया कि विद्यालयों में 4 से 15 नवंबर तक दीपावली अवकाश प्रस्तावित है। इसी अवधि में पंचायत चुनाव के दो चरण होने की स्थिति में शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लग सकती है।
ऐसे में दीपावली अवकाश के दौरान भी कर्मचारियों को चुनावी जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है। इससे शिक्षकों की छुट्टियों और पारिवारिक कार्यक्रमों की योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है।
इनका कहना

“इस महीने 15 से 29 अक्टूबर तक अर्धवार्षिक परीक्षा है। चुनाव और परीक्षा एक साथ आने से शिक्षकों के सामने कई तरह की परेशानियां बढ़ गई हैं। विभाग को समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि परीक्षा और चुनाव दोनों व्यवस्थाएं प्रभावित न हों।”
— सरिता चौधरी, महिला उपाध्यक्ष, जोधपुर
शिक्षकों की मुख्य चिंताएं
- अर्धवार्षिक परीक्षा और पंचायत चुनाव की तारीखों में संभावित टकराव।
- शिक्षकों पर परीक्षा संचालन और चुनाव ड्यूटी की दोहरी जिम्मेदारी।
- चुनाव प्रशिक्षण के कारण विद्यालयों में शिक्षकों की कमी।
- कक्षा 9वीं से 12वीं की राज्य स्तरीय परीक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका।
- कक्षा 8वीं तक की स्कूल स्तरीय परीक्षाओं पर भी असर की संभावना।
- 4 से 15 नवंबर के प्रस्तावित दीपावली अवकाश के दौरान चुनावी ड्यूटी का दबाव।
- शिक्षा निदेशालय के स्पष्ट आदेश का इंतजार।

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