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बदलते मौसम में बढ़ा वायरल का खतरा, मच्छरों से बचाव और खान-पान में सावधानी जरूरी

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दिन में गर्मी और रात में सर्दी से स्वास्थ्य पर असर, चिकित्सकों ने दी सतर्क रहने की सलाह

भोपालगढ़। अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम व रात के समय हल्की ठंड के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। चिकित्सकों के अनुसार मौसम का यह बदलाव स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील है। तापमान में अचानक बदलाव से शरीर की दिनचर्या और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और गले के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

मच्छर जनित बीमारियों से रहें सावधान

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता चौधरी ने बताया कि बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। ऐसे में घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। कूलर, गमले, पक्षियों के परिंडे और छतों पर रखे बर्तनों की नियमित सफाई कर पानी खाली करें।

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उन्होंने बताया कि सुबह-शाम पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने के साथ मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद है।

खान-पान में रखें विशेष सावधानी

सीनियर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र चौधरी ने बताया कि मौसम बदलने के दौरान खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी, आइसक्रीम और बासी भोजन से परहेज करना बेहतर है। भोजन में विटामिन-सी से भरपूर मौसमी फल जैसे संतरा, मौसमी, अमरूद और अनार शामिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि रात के समय हल्दी वाला दूध, अदरक-तुलसी की चाय या काढ़ा लिया जा सकता है। पाचन प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण इस मौसम में ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहता है।

बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लें

डॉ. सरिता चौधरी ने बताया कि मौसम बदलने के दौरान प्यास कम लगने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। दिनभर में करीब 8 से 10 गिलास गुनगुना पानी लिया जा सकता है। उन्होंने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाएं लेने से बचने की सलाह दी।

चिकित्सकों के अनुसार तेज बुखार, जोड़ों में असहनीय दर्द, प्लेटलेट्स में कमी या गले में लगातार खराश जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच, उचित उपचार और पर्याप्त आराम से बीमारी से जल्द रिकवरी में मदद मिल सकती है।

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