राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: कल 3 अक्टूबर को होगा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान, 4 चरणों में मतदान की संभावना; जानें आरक्षण, वोटिंग और आचार संहिता के नियम
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से प्रस्तावित पंचायतीराज चुनावों को लेकर अब तस्वीर साफ होने जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। इस दौरान चुनाव कार्यक्रम, मतदान के चरण, नामांकन प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण तारीखों का ऐलान होने की उम्मीद है। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।
फिलहाल सामने आ रही जानकारी के अनुसार राजस्थान में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना है। हालांकि मतदान की अंतिम तारीखें और पूरा कार्यक्रम निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही निश्चित माना जाएगा।
3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे होगी बड़ी घोषणा
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इसमें पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 का कार्यक्रम सामने आने की संभावना है।
चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित ग्रामीण चुनाव क्षेत्रों में आचार संहिता लागू होगी। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और प्रशासन को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा।
चार चरणों में हो सकता है मतदान
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने की तैयारी है। हालांकि यह अभी संभावित कार्यक्रम है और अंतिम चरणों तथा तारीखों की पुष्टि आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही होगी।
पहले सामने आए प्रस्तावित कार्यक्रमों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराने की जानकारी सामने आई थी। इसलिए ग्रामीण राजस्थान में अब चुनावी गतिविधियां तेजी से बढ़ने की संभावना है।

1.69 लाख से ज्यादा जनप्रतिनिधियों के चुनाव
राजस्थान पंचायत चुनाव में गांव से लेकर जिला स्तर तक बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रमुख पदों की संख्या इस प्रकार है—
| पद | संख्या |
|---|---|
| जिला परिषद सदस्य | 1,403 |
| पंचायत समिति सदस्य | 8,245 |
| जिला प्रमुख | 41 |
| पंचायत समिति प्रधान | 457 |
| ग्राम पंचायत/सरपंच | 14,403 |
| वार्ड पंच | करीब 1.30 लाख |
इन चुनावों के माध्यम से प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों में प्रतिनिधियों का निर्वाचन होगा।
सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव बैलेट पेपर से
इस बार पंचायत चुनाव में मतदान के तरीके को लेकर भी खास व्यवस्था रहेगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार—
- सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्र यानी बैलेट पेपर से होंगे।
- पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव के लिए EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस तरह ग्रामीण मतदाताओं को अलग-अलग पदों के लिए अलग मतदान प्रक्रिया का सामना करना होगा।
महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण
राजस्थान की पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इस चुनाव में भी बड़ी संख्या में पंचायतों और प्रमुख पदों पर महिलाएं निर्वाचित होंगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
- 41 जिला प्रमुख पदों में से 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
- 457 पंचायत समितियों में से 221 प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
- 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी।
- करीब 1.30 लाख वार्ड पंच पदों में लगभग 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
इन जिलों में ST वर्ग के लिए प्रधान पद आरक्षित
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में पंचायत समिति प्रधान के पद ST वर्ग के लिए आरक्षित रहने की जानकारी सामने आई है। इसी तरह इन क्षेत्रों में सरपंच पदों पर भी ST आरक्षण का बड़ा हिस्सा रहेगा।
आचार संहिता लागू होते ही क्या बदलेगा?
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका सीधा असर प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
आचार संहिता के दौरान चुनाव से संबंधित नियमों का पालन करना होगा। सरकारी मशीनरी और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन प्रभावी होगी। वहीं सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों सहित कई प्रशासनिक फैसलों पर भी प्रतिबंध लागू रहने की संभावना है।
ग्रामीण राजस्थान में बढ़ेगी चुनावी हलचल
नगरीय निकाय चुनावों के बाद अब राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों का फोकस गांवों की ओर हो गया है। सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और अन्य पदों के लिए दावेदारों ने जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है।
पंचायत चुनावों का महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इनके जरिए गांव की स्थानीय सरकार से लेकर जिला स्तर तक प्रतिनिधित्व तय होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के निर्वाचन के बाद क्रमशः जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
3 अक्टूबर के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल चार चरणों में चुनाव की संभावना, मतदान की प्रक्रिया, आरक्षण और पदों की संख्या को लेकर जानकारी सामने आ चुकी है, लेकिन चुनाव की अंतिम तारीखें, नामांकन की तिथियां, मतदान केंद्रों से संबंधित विवरण और अन्य कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।
3 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस राजस्थान के ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य के लिए अहम होगी। इसके साथ ही गांव की सरकार चुनने की औपचारिक चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और प्रदेश के हजारों गांवों में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

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