त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत दी है। लगातार बढ़ती खाद्य महंगाई और रसोई के बिगड़ते बजट के बीच केंद्र सरकार ने प्रमुख खाद्य तेलों के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में भारी कटौती का ऐलान किया है। इस कटौती के दायरे में मुख्य रूप से सोयाबीन तेल, पाम तेल और सूरजमुखी तेल को शामिल किया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा असर त्योहारी मांग के दौरान बाजार में खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को महंगे कुकिंग ऑयल से राहत मिलेगी।
केंद्र सरकार ने इस फैसले को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए 23 सितंबर 2026 को आधिकारिक नोटिफिकेशन नंबर 31/2026-Customs जारी कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नई संशोधित दरें 24 सितंबर 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं।
किस तेल पर कितनी घटी कस्टम ड्यूटी?
सरकार ने कच्चे (Crude) और परिष्कृत (Refined) दोनों प्रकार के खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क घटाने का संतुलित फैसला लिया है:
- सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil): सबसे बड़ा बदलाव कच्चे सूरजमुखी तेल की दरों में देखने को मिला है। सरकार ने कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी से घटाकर सीधे शून्य (0%) कर दिया है। इसके साथ ही, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर कस्टम ड्यूटी को 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दिया गया है, यानी इसमें सीधे 10 फीसदी की भारी कटौती की गई है।
- सोयाबीन और पाम ऑयल (Soybean & Palm Oil): आम भारतीय रसोई और फूड इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कच्चे सोयाबीन और पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। वहीं, रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड पाम ऑयल पर सीमा शुल्क को 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी तय किया गया है।
| खाद्य तेल का प्रकार | तेल की श्रेणी | पुरानी कस्टम ड्यूटी | नई कस्टम ड्यूटी | कुल कटौती |
| सूरजमुखी तेल | कच्चा (Crude) | 10% | 0% | 10% |
| सूरजमुखी तेल | रिफाइंड (Refined) | 32.5% | 22.5% | 10% |
| सोयाबीन तेल | कच्चा (Crude) | 10% | 5% | 5% |
| सोयाबीन तेल | रिफाइंड (Refined) | 32.5% | 27.5% | 5% |
| पाम तेल | कच्चा (Crude) | 10% | 5% | 5% |
| पाम तेल | रिफाइंड (Refined) | 32.5% | 27.5% | 5% |
त्योहारी सीजन में क्यों अहम है यह कदम?
भारत में आने वाले कुछ महीनों में नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार मनाए जाएंगे। भारतीय संस्कृति में त्योहारों का मतलब पकवानों, पारंपरिक मिठाइयों और तले-भुने व्यंजनों से होता है। घरों के साथ-साथ हलवाई, रेस्तरां और बेकरी सेक्टर में इस दौरान खाद्य तेलों की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है।
मांग बढ़ने की स्थिति में अक्सर सट्टेबाजी या आपूर्ति की कमी से कीमतें तेजी से चढ़ने लगती हैं। सरकार की इस समयबद्ध पहल का मुख्य उद्देश्य यही है कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे, बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और जमाखोरी या कमी की वजह से कीमतों में असामान्य उछाल न आए।
आयात पर भारत की भारी निर्भरता
भारत दुनिया में खाद्य तेलों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं और आयातकों में से एक है। देश अपनी कुल खाद्य तेल की वार्षिक जरूरत का लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा करता है।
- भारत इंडोनेशिया और मलेशिया से बड़ी मात्रा में पाम ऑयल का आयात करता है।
- सोयाबीन तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से मंगाया जाता है।
- सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन जैसे देशों से आयातित होता है।
चूंकि घरेलू आपूर्ति काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर करती है, इसलिए वैश्विक बाजार में पैदावार, युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या डॉलर के मुकाबले रुपये में आने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार की खुदरा कीमतों पर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर भी कुकिंग ऑयल की दरें पिछले कुछ समय से दबाव में थीं। ऐसे में आयात शुल्क में की गई कटौती से इंपोर्टर्स की लैंडिंग कॉस्ट कम होगी, जिसका सीधा फायदा आपूर्ति श्रृंखला के जरिए खुदरा खरीदारों तक पहुंचेगा।
सरकार द्वारा कस्टम ड्यूटी में कटौती का यह फैसला आम उपभोक्ताओं की जेब को राहत पहुंचाने के साथ-साथ त्योहारी सीजन में समग्र मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा।AI


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