IRCTC पर ChatGPT ने खुद खोजी ट्रेन की टिकट: मुंबई-राजकोट रूट के वायरल वीडियो ने छेड़ी नई बहस, यूजर्स बोले- ‘Tatkal निकाल कर दिखाओ तब मानें!’
सोचिए, आपको अचानक किसी जरूरी काम से मुंबई से राजकोट या देश के किसी भी कोने में जाना हो, और टिकट बुक करने के लिए आपको खुद IRCTC के जटिल वेबपेज, कैप्चा कोड या तारीखों के फेर में न उलझना पड़े. बस आप अपनी स्क्रीन पर एक साधारण सा टेक्स्ट टाइप करें या बोलकर बताएं कि आपको कहां और कब जाना है, और बाकी का सारा सिरदर्द कोई वर्चुअल असिस्टेंट खुद संभाल ले. सुनने में यह किसी भविष्य की साइंस-फिक्शन फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वायरल एक्सपेरिमेंट ने इस कल्पना को हकीकत के बेहद करीब ला खड़ा किया है.
इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक कंटेंट क्रिएटर ने OpenAI के एडवांस AI मॉडल—GPT-6 Astra का इस्तेमाल करके भारतीय रेलवे के आधिकारिक टिकटिंग पोर्टल IRCTC पर टिकट खोजने और बुक करने का लाइव प्रयोग किया. इस वीडियो के सामने आते ही तकनीक प्रेमियों और आम रेल यात्रियों के बीच एक दिलचस्प बहस छिड़ गई है कि क्या भविष्य में इंसानों को टिकट बुकिंग या रोजमर्रा के डिजिटल कामों के लिए खुद वेबसाइटों पर जाना ही नहीं पड़ेगा?
एक यूजर के कमेंट से शुरू हुआ अनोखा प्रयोग
इस पूरे प्रयोग की शुरुआत किसी सोची-समझी योजना के तहत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर आई एक सामान्य टिप्पणी से हुई. क्रिएटर ने हाल ही में GPT-6 Astra की क्षमताओं को लेकर एक रील साझा की थी. उसी वीडियो के कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने उत्सुकतावश सवाल दाग दिया—“क्या यह AI भारत के सबसे व्यस्त और पेचीदा प्लेटफॉर्म यानी IRCTC पर जाकर हमारे लिए ट्रेन टिकट खोज और बुक कर सकता है?”
शुरुआत में क्रिएटर को इस बात पर गहरा संशय था. IRCTC कोई साधारण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं है; यह एक कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल, लेयर्ड ऑथेंटिकेशन और भारी ट्रैफिक वाला सरकारी पोर्टल है. जहां इंसानों को अक्सर टिकट खोजते वक्त ‘सेशन एक्सपायर्ड’ या सर्वर एरर का सामना करना पड़ता है, वहां AI भला कैसे काम करेगा? इसी कौतूहल और चुनौती ने क्रिएटर को यह जोखिम भरा टेस्ट करने के लिए प्रेरित किया.
AI को मिला सिर्फ एक साधारण प्रॉम्प्ट
क्रिएटर ने अपने सिस्टम पर ChatGPT Astra इंटरफेस खोला और उसमें बिना किसी तकनीकी कोडिंग के, सीधे और सरल शब्दों में एक प्रॉम्प्ट दर्ज किया:
“मुझे 20 सितंबर को मुंबई से राजकोट जाना है. दो यात्रियों के लिए रात 9:00 बजे से 11:00 बजे के बीच AC क्लास में टिकट चाहिए. इसके लिए ब्राउज़र टूल का इस्तेमाल करें और उपलब्ध ट्रेनें खोजें.”
बस इतना लिखना भर था कि AI एजेंट ने स्वायत्त (autonomous) तरीके से काम करना शुरू कर दिया. स्क्रीन पर दिख रहा दृश्य वाकई चौंकाने वाला था:
- स्टेशन और समय का सटीक चयन: AI ने निर्देश के मुताबिक सोर्स स्टेशन (मुंबई) और डेस्टिनेशन स्टेशन (राजकोट) को चुना.
- फिल्टर्स का सही उपयोग: उसने तय तारीख (20 सितंबर) डाली और यूजर की प्राथमिकता के आधार पर रात 9 से 11 बजे के स्लॉट और AC क्लास को शॉर्टलिस्ट किया.
- सीट उपलब्धता की जांच: AI ने सीधे IRCTC के डेटाबेस को स्कैन कर ट्रेनों की सूची निकाली और उनमें सीटों की रियल-टाइम उपलब्धता जांची.
शुरुआती खोज में कुछ ट्रेनें तो मिलीं, लेकिन उनमें सीटें कन्फर्म न होकर वेटिंग लिस्ट (WL) में थीं.
‘वेटिंग लिस्ट’ देख AI ने खुद पूछा अगला कदम
जब पहली कोशिश में कन्फर्म टिकट नहीं मिला, तो AI रुका और उसने यूजर से पूछा कि आगे क्या रुख अपनाया जाए. क्रिएटर ने उसे निर्देश दिया—“अगले दिन (21 सितंबर) के लिए विकल्प चेक करो.”
AI ने बिना किसी झिझक के तारीख बदली, दोबारा सर्च क्वेरी रन की और अगले दिन के विकल्पों की विस्तृत सूची स्क्रीन पर ला दी. क्रिएटर के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी भी फॉर्म को मैन्युअल रूप से भरने या अलग-अलग टैब खोलने की जरूरत नहीं पड़ी. AI ने ट्रेन सर्च करने से लेकर क्लास सेलेक्ट करने और यात्री विवरण दर्ज करने तक के कई चरण खुद पूरे कर लिए. अंत में, सुरक्षा कारणों से पेमेंट का अंतिम चरण क्रिएटर ने खुद अपने कार्ड/UPI के जरिए पूरा किया.
सोशल मीडिया पर बजी तालियां और उड़े मज़ाक: ‘असली इम्तिहान तो Tatkal है’
वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट दो गुटों में बंट गया. जहां एक तरफ लोग AI की स्वायत्त ब्राउज़िंग क्षमता (Agentic Capabilities) देखकर दंग रह गए, वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेल के दिग्गज मुसाफिरों ने अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रतिक्रियाएं दीं:
- ‘पहले तत्काल निकाल कर दिखाओ’: सैकड़ों यूजर्स ने चुटकी लेते हुए कहा कि सामान्य दिनों में खाली सीटें खोजना कोई बड़ी बात नहीं है. अगर यह AI सुबह 10:00 बजे (AC) या 11:00 बजे (Non-AC) Tatkal विंडो खुलने पर IRCTC के सर्वर क्रैश और हैंग होने के बीच 60 सेकंड में कन्फर्म टिकट निकाल दे, तभी इसे असली ‘सुपर AI’ माना जाएगा.
- ‘AI को हमारा रिज्यूमे दो, नौकरी दिलवाए’: एक यूजर ने लिखा, “अगर यह IRCTC पर फॉर्म भर सकता है, तो इसे मेरा सीवी देकर कंपनियों में नौकरी के आवेदन करने का काम सौंप देना चाहिए. कम से कम एचआर (HR) का रिजेक्शन मेल तो अपने आप हैंडल कर लेगा!”
- रोजमर्रा के कामों का ऑटोमेशन: अन्य यूजर्स ने कहा कि अगर यह तकनीक इतनी सटीक हो चुकी है, तो आने वाले दिनों में होटल बुकिंग, फ्लाइट वेब-चेकइन, यूटिलिटी बिल पेमेंट और ग्रॉसरी ऑर्डरिंग जैसे दोहराव वाले काम पूरी तरह मशीनों के हवाले हो जाएंगे.
चुनौतियां और व्यावहारिक सीमाएं: क्या सच में इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी?
भले ही यह प्रयोग देखने में जादुई लगे, लेकिन सुरक्षा और तकनीक के जानकारों का मानना है कि इसे पूरी तरह व्यावहारिक बनने में अभी कई बड़ी अड़चनें हैं:
- CAPTCHA और बॉट प्रोटेक्शन: IRCTC जैसी संवेदनशील वेबसाइटें बॉट और ऑटोमेटेड टूल्स को रोकने के लिए जटिल विजुअल और टेक्स्ट कैप्चा का इस्तेमाल करती हैं. पूरी तरह ऑटोमेशन होने पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा ऐसे टूल्स को ब्लॉक किए जाने का खतरा रहता है.
- मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (OTP): लॉगिन से लेकर अंतिम पेमेंट तक बैंक और IRCTC दोनों तरफ से आने वाले OTP बिना इंसानी दखल के प्रोसेस नहीं किए जा सकते, और सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी भी है.
- गलत जानकारी का जोखिम: टिकट बुकिंग में नाम, उम्र, लिंग और यात्रा की तारीख में एक छोटी सी भी गड़बड़ी भारी जुर्माने या टिकट कैंसिलेशन का कारण बन सकती है.
फिलहाल, मुंबई से राजकोट के इस साधारण से प्रयोग ने यह साफ कर दिया है कि AI अब केवल चैट करने वाला खिलौना नहीं रहा, बल्कि वह वेब ब्राउज़र को खुद चलाकर इंसानों के रोजमर्रा के काम निपटाने की दहलीज पर खड़ा है. अब देखना यह है कि क्या भविष्य का रेल यात्री टिकट के लिए खुद संघर्ष करेगा, या उसकी जगह कोई AI एजेंट पलक झपकते ही टिकट डाउनलोड करके थमा देगा.


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