जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे जैसलमेर और बाड़मेर सेक्टर में भारतीय थल सेना का बड़ा सैन्य अभ्यास जारी है। इस अभ्यास के दौरान जोधपुर आर्मी एविएशन कोर के अत्याधुनिक अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर ने भारतमाला हाईवे की सड़क पर सीधे लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। सेना ने यह अभ्यास युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में वैकल्पिक रनवे के इस्तेमाल की क्षमता को परखने के लिए किया।

आमतौर पर सैन्य मिशन के लिए एयरबेस या तैयार हेलीपैड की जरूरत होती है, लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में यदि मुख्य रनवे क्षतिग्रस्त हो जाए तो सेना को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग को अस्थायी एयरस्ट्रिप के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता का परीक्षण किया गया।
रेत के टीलों के बीच हेलिकॉप्टरों ने दिखाया दम
अभ्यास के दौरान रेत के टीलों के बीच बनाए गए अस्थायी हेलीपैड से थल सेना के तीन एच-64ई अपाचे और तीन एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर रुद्र ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। हेलिकॉप्टरों ने हाईवे पर लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया।

इस दौरान लड़ाकू हेलिकॉप्टर अपाचे के साथ अन्य स्वदेशी हेलिकॉप्टर भी सैन्य अभ्यास में शामिल रहे। सेना की यूनिट ने जैसलमेर सेक्टर में हाईवे पर लैंडिंग और टेकऑफ की तैयारियों को परखा।
युद्ध की स्थिति में हाईवे बन सकता है वैकल्पिक रनवे
सीमावर्ती इलाकों में भारतमाला परियोजना के तहत बनी सड़कें काफी मजबूत और चौड़ी हैं। युद्ध या किसी बड़ी आपदा की स्थिति में इनका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए किया जा सकता है।
इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विपरीत परिस्थितियों में भी सेना ईंधन भरने, हथियार लोड करने और घायल जवानों को तत्काल रेस्क्यू करने जैसी गतिविधियां बिना रुके जारी रख सके।
ड्रोन और मानव रहित सिस्टम से निपटने का भी अभ्यास
सैन्य अभ्यास के दौरान सेना ने ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों से उत्पन्न संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों को भी परखा। इससे सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति के दौरान सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने का संदेश मिलता है।

सेना का यह अभ्यास सीमा पर किसी भी परिस्थिति में ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध बुनियादी ढांचे को सैन्य उपयोग में लेने की क्षमता को दर्शाता है।

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