मारवाड़ में बारिश की लंबी बेरुखी से जोधपुर संभाग के किसानों की चिंता बढ़ गई है। भोपालगढ़ और बावड़ी क्षेत्र में बाजरा, मूंग और ग्वार की फसलें सूखने लगी हैं। PRP NEWS की ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ें।
मारवाड़ में मौसम की बेरुखी से धरतीपुत्र की बढ़ी चिंता, भोपालगढ़-बावड़ी क्षेत्र में मुरझाने लगी फसलें, किसान बारिश की आस में
जोधपुर/प्रेमाराम परिहार। मारवाड़ में मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। जोधपुर संभाग के कई जिलों में समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। कहीं खेतों में अभी तक हल भी नहीं चल पाए हैं तो कहीं शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने बुवाई तो कर दी, लेकिन उसके बाद लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें अब मुरझाने लगी हैं। धरतीपुत्रों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं।

इसी स्थिति का जायजा लेने के लिए PRP NEWS की टीम ने जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान धोरू, बागोरिया, रतकुड़िया, भोपालगढ़, हीरादेसर, कुड़ी, सोपड़ा, बिराणी सहित अनेक गांवों में किसानों से बातचीत कर फसलों की वास्तविक स्थिति देखी गई।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि क्षेत्र में शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने बाजरा, मूंग और ग्वार की बुवाई कर दी थी। प्रारंभिक नमी मिलने से फसल अच्छी तरह अंकुरित भी हुई, लेकिन उसके बाद बारिश का लंबा अंतराल पड़ने से अब खेतों में खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं। कई स्थानों पर बाजरे की फसल अच्छी ऊंचाई तक पहुंच चुकी है, लेकिन लगातार नमी की कमी के कारण पौधे सूखने की कगार पर हैं।
किसानों का कहना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो मूंग और ग्वार की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है। कई किसानों ने बताया कि इस बार खेती में भारी लागत लगाने के बावजूद मौसम की बेरुखी उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रही है। यदि समय रहते वर्षा नहीं हुई तो उन्हें आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

बावड़ी क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक
PRP NEWS की टीम ने बावड़ी उपखंड के बुचेटी, गंगानी, सेवकी कला, कास्टी, बिराई, बावड़ी सहित कई गांवों का भी दौरा किया। यहां स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई दी। कई खेत पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान अभी तक बुवाई ही नहीं कर पाए हैं।
वहीं जिन खेतों में बुवाई हो चुकी है, वहां अंकुरित फसलें अब तेज धूप और नमी की कमी के कारण पीली पड़ने लगी हैं तथा धीरे-धीरे सूखती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों बाद इस प्रकार के मौसम के हालात देखने को मिल रहे हैं।

तालाब-पोखर सूखे, पशुओं के लिए भी बढ़ा संकट
लगातार बारिश नहीं होने का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के तालाब, पोखर और छोटे जलस्रोत लगभग सूख चुके हैं। यदि जल्द ही अच्छी वर्षा नहीं हुई तो पशुओं के लिए पीने के पानी और चारे का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगले 5 से 10 दिनों में बारिश नहीं हुई तो पूरे मारवाड़ में अनाज, चारा और पानी का संकट गहरा सकता है, जिससे प्रशासन और सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।
मौसम विभाग से उम्मीद, किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इस उम्मीद के सहारे किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। गांवों में अच्छी बारिश की कामना को लेकर मंदिरों में यज्ञ, हवन और विशेष पूजा-अर्चना भी की जा रही है, ताकि इंद्रदेव प्रसन्न होकर क्षेत्र में झमाझम बारिश करें और सूखती फसलों को नया जीवन मिल सके।
मारवाड़ का किसान आज केवल अपनी फसल नहीं, बल्कि अपने परिवार, पशुधन और पूरे वर्ष की आजीविका बचाने की उम्मीद लेकर बादलों का इंतजार कर रहा है। आने वाले कुछ दिन इस खरीफ सीजन और हजारों किसानों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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