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नितिन गडकरी के E100 इथेनॉल प्लान से चीनी शेयरों में तेजी, डिस्टिलरी कंपनियों को बड़ा फायदा; क्या आगे भी जारी रहेगी रैली?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari के 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E100) के सुझाव के बाद देश की चीनी और डिस्टिलरी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला है। बुधवार को शुरू हुई यह तेजी गुरुवार को भी जारी रही, जिससे निवेशकों का ध्यान इस सेक्टर की ओर बढ़ गया है।

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E100 प्लान से क्यों बढ़े चीनी शेयर

हाल ही में Indian Federation of Green Energy के ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए नितिन गडकरी ने भारत को मौजूदा 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य से आगे बढ़ाकर 100% इथेनॉल (E100) की दिशा में काम करने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अपनाने से भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इस मॉडल को Brazil में दशकों से सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिससे भारत के लिए भी यह एक व्यवहारिक विकल्प माना जा रहा है।

चीनी और डिस्टिलरी कंपनियों को कैसे होगा फायदा

E100 योजना से सबसे ज्यादा फायदा उन चीनी मिलों को हो सकता है, जिनके पास बड़ी डिस्टिलरी क्षमता है। अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे कंपनियों की आय के नए स्रोत खुलेंगे।

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इसी उम्मीद के चलते निवेशकों ने चीनी और डिस्टिलरी सेक्टर में खरीदारी बढ़ाई, जिसके कारण शेयरों में तेजी देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो आने वाले समय में इस सेक्टर में और मजबूती आ सकती है।

तेल आयात घटाने की दिशा में बड़ा कदम

गडकरी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का हवाला देते हुए कहा कि भारत की तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल आयात करता है और जीवाश्म ईंधनों पर हर साल करीब ₹22 लाख करोड़ खर्च करता है। ऐसे में इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देना देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या भविष्य में जारी रह सकती है तेजी?

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार की नीतियां मजबूत होती हैं और E100 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो चीनी और डिस्टिलरी कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है

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